सालभर स्कूल न आने की शर्त रखे विद्यार्थी तो भी दे रहे प्रवेश
इंदौर. शहर में कई स्कूल नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे हैं। प्रतिस्पर्धा के बीच कायदों की धज्जियां उड़ाकर अब एडमिशन दिया जा रहा है। एडमिशन लेते समय कोई विद्यार्थी पूरे सत्र में स्कूल न आने की बात करता है तो भी उसे एडमिशन दे दिया जाता है, जबकि नियम के मुताबिक ७५ प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है। इसकी पूर्ति के लिए फर्जी उपस्थिति लगाने का काम स्कूल संचालक करने लगे हैं।
स्कूल संचालक एडमिशन देते वक्त नियमों का कितना पालन करते हैं, इसका पता लगाने के लिए पत्रिका एक्सपोज ने स्टिंग किया। इस दौरान अशोक नगर स्थित एमपी पब्लिक स्कूल संचालक नियमों के विरुद्ध एडमिशन देने को तैयार हो गए। नियमों को ताक पर रखकर एडमिशन दिए जा रहे हैं, फिर भी शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इसकी अनदेखी किए हुए हैं।
बोर्ड परीक्षाओं में पूरे सत्र के दौरान विद्यार्थी की ७५ फीसदी उपस्थिति अनिवार्य है। एेसा नहीं होने पर छात्र को असंस्थागत कर दिया जाता है। कुछ विशेष परस्थितियों में मंडल की ओर ६५ प्रतिशत उपस्थिति की अनुमति दी जाती है। अगर कोई स्कूल विद्यार्थी के स्कूल आए बिना एडमिशन देकर नियमित रखने के लिए फर्जी उपस्थिति लगाता है तो यह गलत है। मामले की जांच करवाकर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।
सीके शर्मा, डीईओ
पूरे सत्र में स्कूल नहीं आने की छूट
शहर के कई स्कूलों में ज्यादा से ज्यादा एडमिशन देने की होड़ मची रहती है। इसी कड़ी में अगर कोई विद्यार्थी या पालक विद्यार्थी के पूरे सत्र में स्कूल नहीं आने की शर्त रखता है तो भी एडमिशन दे दिया जाता है, जबकि एेसे विद्यार्थी असंस्थागत श्रेणी की पात्रता रखते हैं। एमपी पब्लिक स्कूल तो एक उदाहरण मात्र है, कई अन्य स्कूल भी एेसा करते हैं।
नियमों के मुताबिक सत्र में हर विद्यार्थी की ७५ प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है। एेसा नहीं होने पर विद्यार्थी को असंस्थागत श्रेणी में परीक्षा में शामिल किया जाता है। जो स्कूल विद्यार्थी के स्कूल नहीं आने की शर्त पर एडमिशन दे देते हैं, वे रजिस्टर में फर्जी उपस्थिति लगाकर नियम की पूर्ति करते हैं, ताकि विद्यार्थी को नियमित परीक्षार्थी के रूप में दिखाया जा सके। कुछ स्कूल इसके लिए फीस व अन्य शुल्क के अतिरिक्त राशि वसूलते हैं और कुछ फीस में ही स्कूल न आने की अनुमति दे देते हैं। इस फर्जीवाड़े पर शिक्षा विभाग के जिम्मेदार ध्यान नहीं देते हैं और न ही स्कूलों का आकस्मिक निरीक्षण किया जाता है।
नहीं देते एेस विद्यार्थी को एडमिशन
हमारे स्कूल में जो विद्यार्थी एडमिशन लेने के समय स्कूल नहीं आने की शर्त रखते हैं, उनको एडमिशन नहीं दिया जाता है। अगर किसी छात्र में शारीरिक अक्षमता है तो अलग बात है। इसके अलावा कोई छात्र स्कूल नहीं आए इस तरह की अनुमति हम नहीं देते हैं।
दिलीप बुधानी,
संचालक, एमपी पब्लिक स्कूल
स्कूल टीचर व संचालक से बातचीत के अंश
रिपोर्टर- १२वीं का एडमिशन करवाना है, मेरी बहन का।
टीचर- ११वीं कहां से की है?
रिपोर्टर- पीथमपुर से की है।
टीचर- ११वीं का कितना प्रतिशत था और विषय कौन सा है?
रिपोर्टर- ५५ प्रतिशत और विषय कॉमर्स है।
टीचर ने रिपोर्टर को फीस के बारे मंे बताकर फॉर्म दिया।
रिपोर्टर- मैडम लेकिन मेरी बहन स्कूल नहीं आएगी।
टीचर- क्यों?
रिपोर्टर- बस मैडम थोड़ी दूर है घर और थोड़ी प्राब्लम भी, इसीलिए नहीं आएगी।
टीचर- एक मिनिट! सर से बात करनी पड़ेगी।
फिर एक सर को मैडम ने बुलाया,
सर- जी बताइए।
रिपोर्टर- सर मेरी बहन को १२वीं में एडमिशन दिलाना है, लेकिन वह स्कूल नहीं आएगी।
सर - ११वीं पास है, क्या विषय है, कितना प्रतिशत हैं?
रिपोर्टर - हां पास है। ५५ प्रतिशत के आसपास है और कॉमर्स विषय है।
सर- स्कूल नहीं आने का कारण क्या है। कोई प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही है क्या?
रिपोर्टर- हां! प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी कर रही है और दूसरे कारण भी हैं।
सर- कितना स्कूल आ सकती है, कम आएगी तो कितना कम आएगी। क्योंकि परीक्षा में तो आना पड़ेगा। फॅार्म भरने में उसकी जरूरत पड़ेगी।
रिपोर्टर- फॉर्म भरने और परीक्षा देने के लिए तो आ जाएगी, लेकिन क्लास अटेंड करने के लिए नहीं आ पाएगी।
सर- ठीक है आप एक आवेदन दे दो। मार्कशीट के आधार पर एडमिशन मिल जाएगा।
रिपोर्टर- कुछ एक्सट्रा फीस तो नहीं देनी होगी।
सर- नहीं इसमें ही हो जाएगा। आपको बस एक आवेदन देना होगा। उसमें यह लिखना कि छात्रा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही है, इसीलिए स्कूल कम आएगी, लेकिन बिल्कुल नहीं आएगी यह मत लिखना, क्योंकि उसकी उपस्थिति डालना होगी हमें। नहीं तो ७५ प्रतिशत से कम उपस्थिति होगी तो वह प्राइवेट हो जाएगी।
रिपोर्टर - वह रहेगी तो नियमित छात्रा ही न।
सर- हां वह नियमित छात्रा ही रहेगी।