Indore News : जन्म से मिली संस्कृति की विरासत को आदिवासी कलाकारों ने उत्साह के साथ पसतृत किया। इसमें कई प्रचलित गीतों में से एक छोटी सी उम्र में 'म्हारी सगाई कराई दी...' पर खुले मन से नृत्य की प्रस्तुति देते नजर आए।
Indore News :मध्य प्रदेश के धार, झाबुआ, आलीराजपुर के जंगलों में बसी आदिवासी संस्कृति शुक्रवार को इंदौर के गांधी हॉल परिसर में आयोजित तीन दिवसीय जनजातीय जत्रा के सांस्कृतिक संगम में देखने को मिली। जंगलों के बीच बसी इस पंरपरा को लोगों के बीच बगैर किसी आंडबर के पेश किया गया। नृत्य की जीवंतता कहे या फिर खाने की मन को छू लेने वाली महक। उम्र और समय का परिवर्तन संस्कृति से जुड़ाव को कम नहीं कर सकी।
जन्म से मिली संस्कृति की विरासत को आदिवासी कलाकारों ने उत्साह के साथ पसतृत किया। इसमें कई प्रचलित गीतों में से एक छोटी सी उम्र में 'म्हारी सगाई कराई दी…' पर खुले मन से नृत्य की प्रस्तुति देते नजर आए।
गांधी परिसर में ग्रामीण परिवेश को दर्शाने के लिए घास की टपरिया और कुएं जैसे दृश्य बनाए गए। ठेठ आदिवासी वेशभूषा में सिल बटटे और दाल व ज्वार के व्यंजनों को लेकर आलीराजपुर गुलबट का आदिवासी परिवार पहुंचा। इन्होंने उड़द की दाल के कच्चे बरे और ज्ञवार की रोटी और पकौड़े को प्लेट या पेपर के बजाए खाखरे (पलाश) के पत्तों पर तेल में तलने से पूर्व रखा। पत्ते गीले और खराब नहीं होते हैं। पेपर खराब हो जाता है।
झाबुआ के आदिवासी कलाकारों के साथ नृत्य की सुंदरता को लिए गांधी हॉल पहुंचे हिंदू सिंह अमलियार ने बताया कि, इस नृत्य को उन्होंने बचपन से परिवार के साथ किया। हालांकि, पिछले 20 वर्षों से इस परंपरा को मंच तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। इस नृत्य प्रस्तुति में टीम में कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं शामिल हुए हैं। इन सभी कलाकारों का कहना है कि हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान है। इसे देश व दुनिया का हर व्यक्ति समझे और सम्मानित करें| इसी उदेश्य से नृत्यों की प्रस्तुति बहुत ही सादगी के साथ दी जाती है।
सह संयोजक आशीष गुप्ता ने बताया कि, जत्रा में सोशल मीडिया के साथ ही शादियों में सबसे ज्यादा डांस नंबर के रूप में पसंद किए जाने वाला गीत काका-बाबा ने पोरिया को हिट कराने वाले आनंदी लाल भावेल शनिवार को शहर पहुंचे। शाम को उनके गुप द्वारा लाइव म्यूजिक और डांस प्रस्तुतियां दी
जाएंगी।
संयोजक गिरीश चौव्हाण व अध्यक्ष देवकीनंदन तिवारी ने बताया कि, इस कार्यक्रम भगोरिया नृत्य को शहर के दर्शक शनिवार और रविवार को भी देख सकेंगे। होली के त्योहार पर होने वाली ये प्रस्तुतियां हमेशा चर्चा में रहती है। इसके साथ ही पिथौरा आर्ट के साथ ही कपड़ों पर बनाई जाने वाली कलाकृतियों को भी देख सकेंगे।