देपालपुर के चित्तौड़ा में पहुंचे थे कलेक्टर
इंदौर. खाट पर रात्रिकालिन चौपाल सजी थी। कलेक्टर समस्या जानने का प्रयास कर रहे थे और उस बीच गांव की महिला ने सवाल दाग दिया। कहना था कि प्रधानमंत्री आवास में मिलने वाली सहायता में शहर और गांव के बीच भेदभाव क्यों है? यह सुनकर कलेक्टर भी स्तब्ध हो गए। जवाब दिया कि ये मेरा विषय नहीं है केंद्र व राज्य सरकार तय करती है।
शनिवार को कलेक्टर आशीष सिंह ने देपालपुर के चितौड़ा गांव में रात्रिकालीन खाट चौपाल लगाई। कलेक्टर का स्वागत फसलों के बने गुलदस्ते से हुआ। मौके पर एसडीओ रवि वर्मा और जिला पंचायत उपाध्यक्ष भरत पटेल भी थे। ग्रामीणों समस्याओं को समझने का प्रयास किया और संबंधित अफसरों को हल करने के निर्देश दिए।चर्चा के दौरान माया बाई ने प्रधानमंत्री आवास के बंद पड़े सर्वे को चालू करने का आग्रह किया। कहना था कि हम कच्चे मकान में रह रहे हैं सरकार मदद करेगी तो मकान पक्का हो जाएगा। बातों ही बातों में माया बाई ने बोल दिया कि शहरी लोगों को तो 2.65 लाख सरकार देती है, लेकिन गांव में ये पैसा 1.38 लाख ही मिलता है। हमारे साथ ये भेदभाव क्यों? यह सुनकर पहले तो कलेक्टर सोच में पड़ गए। फिर कहा कि ये मामला केंद्र और राज्य सरकार का है, लेकिन मैं आपकी बात ऊपर तक जरूर पहुंचाऊंगा।
नीलगाय कर रही है फसल नष्ट
किसान रामेश्वर राठौर का कहना था कि साहब नीलगाय फसल खराब कर रही है। हम कब तक चौकीदारी करे। झुंड बनाकर आती है और फसल उजाड़ देती है। सिंह का कहना था कि बहुत जगह ये समस्या आ रही है। वन विभाग के अफसरों से इसे लेकर बात कर कोई हल निकालने का प्रयास करेंगे।
ये भी बात सामने आई
ग्रामीणों ने बाढ़ में खराब हुई फसल का मुद्दा उठाया जिसमें कृषि विभाग के अफसरों से पूछा गया। जवाब था कि एक सर्वे सूची आना बाकी है जिसमें सभी के नाम आएंगे। कुछ ग्रामीणों ने सरकारी स्कूल के जर्जर का मुद्दा उठाया तो कलेक्टर ने तोड़ने के निर्देश दिए। वहीं, पानी की समस्या सुनने के बाद कलेक्टर ने पंचायत सचिव को डांट भी लगाई और कहा कि अगली बार शिकायत नहीं आना चाहिए।