जबलपुर

एमपी के डीजीपी कैलाश मकवाना पर भड़का हाईकोर्ट, जज ने व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में बुलाया

MP DGP Kailash Makwana : हाईकोर्ट ने डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा रिकवरी नहीं लौटने पर सख्त निर्देश, सेवानिवृत्त महिला सब-इंस्पेक्टर का मामला
2 min read
Aug 28, 2026
हाईकोर्ट ने डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा
हाईकोर्ट ने डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा - फोटो सोर्स : X @ips_kmak

Kailash Makwana : मध्यप्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाना को कोर्ट की नाराजगी का शिकार होना पड़ा है। उन्हें अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा गया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने एक मामले में डीजीपी कैलाश मकवाना सहित दो अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के रवैए पर कड़ी नाराजगी जताई। ​पुलिस विभाग की एक सेवानिवृत्त महिला सब-इंस्पेक्टर की रिकवरी नहीं लौटने पर कोर्ट ने यह सख्त रवैया अख्तियार किया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि तय समय सीमा में राशि वापस नहीं करने पर डीजीपी कैलाश मकवाना सहित सभी अधिकारियों को अगली सुनवाई में 28 सितंबर को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।

जबलपुर हाईकोर्ट में सेवानिवृत्त महिला सब-इंस्पेक्टर लजवर खानम की याचिका पर सुनवाई चल रही है। उनकी 17 लाख की अवैध रिकवरी वापस न करने पर हाईकोर्ट ने डीजीपी कैलाश मकवाना सहित 3 अधिकारियों पर नाराजगी जाहिर की। तीनों को अंतिम अवसर दिया है।

हाईकोर्ट के जज विवेक जैन की एकल पीठ ने सेवानिवृत्त महिला सब-इंस्पेक्टर लजवर खानम के मामले में सख्त निर्देश जारी किए। उन्होंने आगामी 4 सप्ताह के भीतर पूरी राशि वापस करने के निर्देश दिए

डीजीपी कैलाश मकवाना, ममतेश माली और शोभा भाकरिया को कोर्ट में उपस्थित होना होगा

जज विवेक जैन की पीठ ने कहा कि यदि सेवानिवृत्त महिला सब-इंस्पेक्टर लजवर खानम की राशि तय समयावधि में वापस नहीं की जाती, तो डीजीपी कैलाश मकवाना, तत्कालीन भोपाल एसपी ममतेश माली और पेंशन अधिकारी शोभा भाकरिया को अगली सुनवाई कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। यह पेशी 28 सितंबर को रखी गई है।

कोर्ट हर हाल में उसके आदेशों का पालन सुनिश्चित करना चाहती है

हाईकोर्ट द्वारा डीजीपी कैलाश मकवाना को व्यक्तिगत रूप से तलब करने पर पुलिस विभाग में हलचल मच गई है। डीजीपी को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश का उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई किए जाने का मतलब तो नहीं है पर इससे वरिष्ठ अधिकारी दबाव में आ गए हैं। अदालत के सख्त रवैए से यह साफ हो गया है कि कोर्ट हर हाल में उसके आदेशों का पालन सुनिश्चित करना चाहती है। इसके साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करना चाहती है। इस नजरिए से हाईकोर्ट में केस की अगली सुनवाई अहम साबित होगी। कोर्ट का रुख, डीजीपी और राज्य सरकार के जवाब पर निर्भर करेगा।

Updated on:
28 Aug 2026 10:22 am
Published on:
28 Aug 2026 09:13 am