जगदलपुर। आदिवासियों की गौरवशाली संस्कृति दिखाई देती है। उक्त बातें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को लालबाग मैदान में संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम-2026 के उद्घाटन अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए कहीं।
जगदलपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि बस्तर की सुंदरता एवं संस्कृति हमेशा लोगों के आकर्षण का केंद्र रही है। आदिवासियों की संस्कृति में छत्तीसगढ़ की आत्मा बसती है। छत्तीसगढ़ मेरे लिए घर जैसा है। जहां सरकार आदिवासियों की संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और प्राचीन विरासतों को संरक्षित करने के लिए बस्तर पंडुम जैसे आयोजन कर रही है, इसमें आदिवासियों की गौरवशाली संस्कृति दिखाई देती है। उक्त बातें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को लालबाग मैदान में संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम-2026 के उद्घाटन अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की विष्णुदेव सरकार छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के उत्थान के लिए समर्पित है। बस्तर क्षेत्र में बालिका शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा से जोड़ने के लिए शासन के संग समाज और माता-पिता को भी आगे आना चाहिए। चार दशकों से यह इलाका माओवादी हिंसा ग्रस्त रहा हैं लेकिन भारत सरकार की माओवादी आतंक पर निर्णायक कार्रवाई के परिणामस्वरूप वर्षों से व्याप्त भय और अविश्वास का वातावरण अब समाप्त हो रहा है। बस्तर पंडुम में 54 हजार से अधिक आदिवासी कलाकारों ने पंजीयन कराया।
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पंडुम मेला नहीं, लोक संस्कृति का उत्सव हैं : राज्यपाल
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि बस्तर पंडुम कोई साधारण मेला नहीं है, यह हमारी लोक संस्कृति का उत्सव है। यहां के लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक पहनावा, आभूषण, ढोल-नगाड़े और हमारे पारंपरिक व्यंजन सब मिलकर बस्तर की सुंदर तस्वीर दुनिया को दिखाती है। उन्होंने कहा कि इस तरह का महोत्सव हमारी आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनता है।
बस्तर में अब डर का स्थान भरोसे ने लिया ; सीएम
सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक आयोजन नहीं है, बल्कि यहां के जनजातीय समाज के जीवन, उनकी आस्था, बोली-भाषा, नृत्य-गीत, वेशभूषा, खान-पान और उनके जीवन-दर्शन का जीवंत प्रतिबिंब है। सीएम ने कहा कि एक समय था जब बस्तर को नक्सलवाद और हिंसा के लिए जाना जाता था, विकास यहां तक पहुंच नहीं पाता था। लोगों के मन में भय था, भविष्य को लेकर अनिश्चितता थी लेकिन आज डर की जगह भरोसे ने और हिंसा की जगह विकास ने ले ली है।
पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री शाह के दृढ़ संकल्प से 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समूल उन्मूलन का लक्ष्य तय किया है। आज बस्तर में बदलाव साफ दिखाई देता है। जहां कभी गोलियों की भयावह आवाज़ गूंजती थी, आज वहां स्कूलों की घंटी बजती है। जहां कभी तिरंगा नहीं लहरा पाया, आज वहां राष्ट्रगान की गूंज सुनाई देती है। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री तोखन साहू, गृहमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल भी मौजूद थे।