जयपुर

IIT बॉम्बे में राजस्थान के छात्र की खुदकुशी, हॉस्टल की छत से कूदकर दी जान

जब सुरक्षा गार्ड और देर रात तक पढ़ाई कर रहे छात्र मौके पर पहुँचे, तो नमन जमीन पर लहूलुहान हालत में पड़ा था। नमन को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया

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Feb 04, 2026

मुंबई/पिलानी: इंजीनियरिंग की दुनिया में देश का सिरमौर कहे जाने वाले आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) के पवई कैंपस से बुधवार तड़के एक विचलित करने वाली खबर आई। राजस्थान के पिलानी निवासी 21 वर्षीय छात्र नमन अग्रवाल ने हॉस्टल की नौवीं मंजिल की छत से कूदकर आत्महत्या कर ली।

नमन बीटेक सिविल इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष का छात्र था। इस घटना ने एक बार फिर उन कड़वे सवालों को जिंदा कर दिया है कि आखिर क्यों हमारे होनहार छात्र मौत का रास्ता चुन रहे हैं?

रात का सन्नाटा और 'मौत' की गूंज !

पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना बुधवार तड़के करीब 1:30 बजे की है। पवई स्थित कैंपस के हॉस्टल नंबर 4 में अचानक एक जोरदार आवाज सुनाई दी। जब सुरक्षा गार्ड और देर रात तक पढ़ाई कर रहे छात्र मौके पर पहुँचे, तो नमन जमीन पर लहूलुहान हालत में पड़ा था। नमन को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

जांच का पेंच:

नमन मूल रूप से हॉस्टल नंबर 3 में रहता था, लेकिन उसने छलांग हॉस्टल नंबर 4 की छत से लगाई। पुलिस अब उसके रूममेट्स और दोस्तों से पूछताछ कर रही है कि आखिर वह रात के उस पहर दूसरे हॉस्टल की छत पर क्यों गया था?

नहीं मिला कोई सुसाइड नोट

पवई पुलिस ने फिलहाल इस मामले में एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नमन के कमरे या घटना स्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, जिससे उसकी मानसिक स्थिति या किसी तात्कालिक परेशानी का पता चल सके। पिलानी में रहने वाले नमन के परिजनों को सूचना दे दी गई है और शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।

आईआईटी में 'सुसाइड', डरा देने वाले आंकड़े

नमन की मौत कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में आईआईटी परिसरों में आत्महत्या के मामलों में भयावह वृद्धि हुई है।

  • पिछले 5 साल का रिकॉर्ड: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में विभिन्न आईआईटी में 35 से अधिक छात्रों ने जान दी है।
  • ताजा मामले: अभी पिछले महीने (20 जनवरी 2026) को ही आईआईटी कानपुर में एक पीएचडी स्कॉलर ने खुदकुशी की थी। आईआईटी कानपुर में पिछले दो वर्षों में यह 8वीं आत्महत्या थी।
  • आईआईटी बॉम्बे का इतिहास: फरवरी 2023 में भी इसी कैंपस में दर्शन सोलंकी नाम के छात्र ने आत्महत्या की थी, जिसके बाद काफी बवाल हुआ था।

विफलता का डर या अकादमिक दबाव?

जांच एजेंसियों और विशेषज्ञों का मानना है कि इन आत्महत्याओं के पीछे कई जटिल कारण हैं।

  • अकादमिक बोझ: आईआईटी का पाठ्यक्रम और निरंतर प्रतिस्पर्धा छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती है।
  • अकेलापन और अलगाव: घर से दूर बड़े संस्थानों में कई बार छात्र खुद को अकेला महसूस करते हैं।
  • नौकरी और भविष्य की चिंता: प्लेसमेंट का दबाव और असफल होने का डर युवाओं को इस चरम कदम की ओर धकेल रहा है।

क्या 'काउंसलिंग' काफी है?

हाल के वर्षों में आईआईटी ने कई सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं, जैसे:

  • मानसिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग: आईआईटी कानपुर ने नए छात्रों के लिए अनिवार्य मेंटल हेल्थ स्क्रीनिंग शुरू की है।
  • प्रोटोकॉल: हॉस्टलों में ग्रिल लगाना, छतों तक पहुंच सीमित करना और काउंसलिंग सेंटर्स का विस्तार करना। हालांकि, छात्रों का कहना है कि जब तक संस्थान की 'परफॉर्मेंस ओरिएंटेड' संस्कृति और 'टॉक्सिक कॉम्पिटिशन' कम नहीं होगा, ये उपाय केवल सतही साबित होंगे।
Updated on:
04 Feb 2026 01:48 pm
Published on:
04 Feb 2026 01:47 pm
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