
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग के केंद्र सरकार के फैसले और लगातार बढ़ रही चीनी की कीमतों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बड़ा जुबानी हमला बोला है। गहलोत ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक बयान जारी करते हुए आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार की अदूरदर्शिता और बिना पूर्व तैयारी के लिए गए फैसलों की भारी कीमत देश और राजस्थान की आम जनता को चुकानी पड़ रही है।
गहलोत के अनुसार, चीनी उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले गन्ने का बड़ा हिस्सा अब एथेनॉल बनाने में डाइवर्ट किया जा रहा है, जिससे खुले बाजार में चीनी की सप्लाई कम हो गई है और महज 15 दिनों के भीतर इसके दाम 14 से 17 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं।
राजस्थान की सियासत में इस बयान के सामने आने के बाद हलचल बढ़ गई है, क्योंकि गहलोत ने चीनी की महंगाई के साथ-साथ सीधे आम वाहन चालकों के पॉकेट पर पड़ रहे असर को भी मुद्दा बनाया है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने बयान में एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के दूरगामी दुष्प्रभावों को विस्तार से बताया है। उन्होंने कहा कि गन्ने की अधिकांश मात्रा को एथेनॉल उत्पादन में लगाने के कारण बाजार में चीनी की किल्लत पैदा हो रही है। यही वजह है कि अचानक चीनी की रिटेल कीमतों में प्रति किलो 14 से 17 रुपये का उछाल देखने को मिला है।
गहलोत ने आरोप लगाया कि बिना तैयारी और मानकों के पेट्रोल में एथेनॉल की अधिक मात्रा मिलाने से आम गाड़ियों के इंजन खराब हो रहे हैं और गाड़ियों का माइलेज घट रहा है, जिससे आम आदमी का मेंटेनेंस खर्च बढ़ गया है। एथेनॉल के अनियंत्रित और बिना तैयारी वाले उत्पादन से देश के कई हिस्सों में हवा और पानी के प्रदूषित होने की गंभीर शिकायतें आ रही हैं।
अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे आम जनता के पैसे की सीधी लूट करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "एथेनॉल ब्लेंडिंग से वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंच रहा है, माइलेज कम हो रहा है जिसमें आमजन का पैसा लग रहा है। यह सीधे-सीधे आम आदमी की मेहनत की कमाई की लूट है। इस पूरे खेल में मुनाफा चंद उद्योगपतियों और सरकार को हो रहा है, त्रस्त सिर्फ आम जनता हो रही है।"
अशोक गहलोत ने अपने बयान के अंत में कहा कि केंद्र सरकार ने बिना पूरी रिसर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किए ऐसा फैसला थोप दिया है, जिसका खामियाजा पूरे देश को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार अब जनता का विश्वास पूरी तरह खो चुकी है, इसलिए वह अपने इन विवादास्पद और आमजन-विरोधी फैसलों पर किसी को संतोषजनक जवाब या भरोसा नहीं दिला पा रही है।
सवाल अब ये है कि क्या अशोक गहलोत का ये दावा सही है क्या? दावे की पड़ताल करने पर सामने आता है कि सरकार खुद मानती है कि एथेनॉल नीति के तहत चीनी उद्योग से एथेनॉल की ओर डायवर्जन हुआ है। लेकिन इसके साथ ही मौजूदा चीनी संकट के बीच सरकार अब गन्ने से एथेनॉल बनाने पर नियंत्रण लगाने पर विचार कर रही है, ताकि घरेलू चीनी की उपलब्धता बढ़ाई जा सके।
एक समाचार एजेंसी के अनुसार मौजूदा सीजन में करीब 30 लाख टन चीनी एथेनॉल के लिए डायवर्ट हुई है और सरकार अगले सीजन में गन्ने के इस्तेमाल को सीमित करने पर विचार कर रही है। इसलिए यह कहना कि "एथेनॉल और चीनी बाजार का कोई संबंध ही नहीं है", सही नहीं होगा। लेकिन यह कहना भी सही नहीं होगा कि चीनी के दाम बढ़ने की पूरी या मुख्य वजह सिर्फ मोदी सरकार की एथेनॉल नीति है।
दरअसल, वर्तमान चीनी संकट में कम उत्पादन और खराब मौसम महत्वपूर्ण कारण हैं। सरकार के मुताबिक इस साल चीनी उत्पादन का अनुमान शुरुआती 343 लाख टन से घटकर करीब 306 लाख टन रह गया है।
गहलोत का वाहनों के माइलेज में कमी का दावा पूरी तरह गलत नहीं है। NITI Aayog के अध्ययन में E20 के इस्तेमाल से पुराने E0/E10-calibrated वाहनों में fuel efficiency कम होने का अनुमान दिया गया था। लेकिन 'एथेनॉल ब्लेंडिंग से इंजन खराब हो रहे हैं' को व्यापक तथ्य के रूप में कहना अभी उपलब्ध प्रमाणों से सही नहीं बैठता।
सरकार के अनुसार 20 करोड़ से ज्यादा दोपहिया और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें E15+ या E20 पर चल चुकी हैं और व्यापक इंजन फेलियर का प्रमाण नहीं मिला।
दिलचस्प बात ये है कि मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंता नागेश्वर ने हाल ही में E20 के साथ E10 जैसे कम-blend विकल्प को फिर उपलब्ध कराने की बात कही है, खासकर पुराने वाहनों को लेकर उठ रही चिंताओं के संदर्भ में।