— रीको और एनआइसीडीआइटी ने स्टेट सपोर्ट एग्रीमेंट और स्टेट सपोर्ट एग्रीमेंट पर किए दस्तखत, केबीएनआइआर का विकास अब संभव
जयपुर. राज्य में औद्योगिक विकास की सबसे बड़ी परियोजना दिल्ली—मुम्बई औद्योगिक कॉरिडोर (डीएमआईसी) में करीब दस वर्ष बाद राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है।
परियोजना के स्पेशल पर्पज व्हीकल के तौर पर प्रस्तावित राजस्थान इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (रिडको) के गठन के लिए नई दिल्ली में केन्द्र और राज्य सरकार के बीच दो करारों पर हस्ताक्षर कर लिए गए हैं। इनमें पहला शेयर होल्डिंग एग्रीमेंट (एसएचए) है, जबकि दूसरा स्टेट सपोर्ट एग्रीमेंट (एसएसए) है।
एसएचए के तहत प्रदेश में परियोजना का संचालन करने वाली कंपनी रिडको में राज्य का शेयर 51 प्रतिशत और केन्द्र की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत होगी। जबकि, एसएसए के त्रिपक्षीय समझौते में रीको और नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट एंड इंपलीमेंटेशन ट्रस्ट (एनआइसीडीआईटी) के अलावा उद्योग विभाग भी शामिल है।
पंजीकृत होगी कंपनी, बनेंगे निदेशक
अब राज्य में रिडको का नई कंपनी के तौर पर पंजीकरण कराया जाएगा। कंपनी में केन्द्र और राज्य के तीन—तीन निदेशक बनेंगे। सीईओ का जिम्मा रीको के प्रबंध निदेशक के पास होगा।
80 करोड़ से आगे बढ़ेगी गाड़ी
नई कंपनी पंजीकृत होने के बाद डीएमआइसी प्रथम चरण के खुशखेडा-भिवाड़ी-नीमराणा निवेश क्षेत्र में अवाप्त भूमि के बदले 418 करोड़ रुपए मुआवजा वितरण हो सकेगा। बीते करीब दस साल में अब तक सिर्फ 80 करोड़ रुपए ही वितरित हो पाए हैं। अब अवाप्त भूमि राज्य की लैंड इक्विटी के तौर पर कंपनी को मिलेगी। बदले में एनआइसीडीआईटी मुआवजे की राशि देगा।
ढ़ाई माह बाद मिली सफलता
जुलाई माह में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्पेशल पर्पज व्हीकल को मंजूरी दी थी। इसके बाद 14 जुलाई को एनआइसीडीआइटी और रीको के बीच नई दिल्ली में बैठक के दौरान एसएसए और एसएचए के प्रारूप मंजूर किए गए। एनसीआर से महाराष्ट्र तक रेलवे के डीएफसी के राजस्थान से गुजर रहे हिस्से के दोनों ओर 150 किलोमीटर में डीएमआईसी विकसित होगा।