
जयपुर। दिल्ली में वोट चोरी के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआइ कार्यकर्ता रितु बराला के साथ कथित मारपीट का मामला राजस्थान में राजनीतिक तूल पकड़ रहा है। एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोमवार शाम पार्टी नेताओं और लीगल टीम के साथ जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में धरना शुरू कर दिया।
रात भर कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता कमिश्नरेट कार्यालय के अंदर और बाहर डटे रहे। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी धरनास्थल पर पहुंचे। डोटासरा ने चेतावनी दी कि रितु बराला के मामले में एफआईआर दर्ज नहीं होने तक कांग्रेस पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने मंगलवार सुबह पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय का घेराव करने का ऐलान करते हुए प्रदेशभर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं से जयपुर पहुंचने का आह्वान किया है।
इधर, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार से पूछा है कि आखिर एफआइआर दर्ज करने में पुलिस प्रशासन के हाथ किसने बांध रखे हैं? प्रदेश की बेटी को न्याय देने में आखिर भाजपा सरकार को क्या परेशानी है? उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक रितु बराला की एफआइआर दर्ज नहीं होगी, तब तक कांग्रेस न पीछे हटेगी और न झुकेगी।
लीगल टीम और नेता पहले रितु बराला के साथ मोती डूंगरी थाने पहुंचे थे। यहां थाना प्रभारी को एफआइआर दर्ज करने के लिए लिखित शिकायत दी गई, लेकिन मामला दर्ज नहीं हुआ। इसके बाद शाम करीब सवा 6 बजे कांग्रेस नेता पुलिस कमिश्नरेट पहुंच गए। पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल वहां मौजूद नहीं थे। डोटासरा ने उनसे फोन पर बात कर संबंधित आरोपियों के खिलाफ जीरो एफआइआर दर्ज करने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक एफआइआर दर्ज नहीं होगी, वे वहां से नहीं हटेंगे। देर रात पूर्व सीएम अशोक गहलोत भी जोधपुर से कमिश्नरेट कार्यालय पहुंचे। हालांकि थोड़ी देर बाद चले गए।
विधायक रफीक खान, अमीन कागजी, पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, एनएसयूआइ के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़, प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष सारिका सिंह, वॉररूम चेयरमैन जसवंत गुर्जर, राजेन्द्र यादव, मीडिया चेयरपर्सन स्वर्णिम चतुर्वेदी और शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा सहित कई नेता रात भर धरने पर बैठे रहे। राहुल गांधी ने डोटासरा को फोन कर रितु बराला के मामले में जयपुर में एफआइआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे।
दिल्ली में घटना हुई और दिल्ली पुलिस को भी इन्होंने रिपोर्ट दी है। अन्य स्टेट की पुलिस ने जीरो एफआइआर दर्ज कर दिल्ली भेजी है। एक ही घटना की अलग-अलग एफआइआर दर्ज नहीं होती। इसलिए समझाया है कि उनकी प्राथमिकी दर्ज की है। जांच के लिए दिल्ली पुलिस व जीरो एफआइआर दर्ज करने वाली स्टेट पुलिस से जानकारी ली जाएगी।
- सचिन मित्तल, पुलिस कमिश्नर