जयपुर

नौकरशाही में भ्रष्टाचार, अब एसीबी लेगी सीए दल की मदद

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) अकूत सम्पत्ति पकड़ने के बाद भी सम्बधित सरकारी अधिकारी पर आय से अधिक सम्पत्ति का मामला साबित नहीं कर पाता।
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Dec 22, 2019
 corruption news
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ओमप्रकाश शर्मा
जयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) अकूत सम्पत्ति पकड़ने के बाद भी सम्बधित सरकारी अधिकारी पर आय से अधिक सम्पत्ति का मामला साबित नहीं कर पाता। आय और जब्त सम्पत्ति का गुणा-भाग सही नहीं बैठाने से आरोपी अधिकारियों को सजा नहीं मिल रही। ब्यूरो अब गणित समझने के लिए चार्टर्ड एकाउंटेंट्स के पैनल की मदद लेगा। मामले को समझने के साथ ही चार्जशीट पेश करने के लिए सीए का पैनल गठित किया जाएगा। एसीबी ने यह निर्णय सजा के गिरते प्रतिशत को सुधारने के लिए किया है। राजस्थान की एसीबी ने यह सीख गुजरात एसीबी से ली है।

एसीबी सालाना चार सौ से पांच सौ मामले दर्ज करती है। इसमें सबसे अधिक मामले रंगे हाथ रिश्वत लेते गिरफ्तार करने व पद के दुरुपयोग के होते हैं। सबसे कम मामले आय से अधिक सम्पत्ति के होते हैं। इसके बावजूद सजा के मामले में सबसे कम सफलता आय से अधिक सम्पत्ति के मामलों में मिलती है। एसीबी के अन्य मामलों में सजा का प्रतिशत 57.78 प्रतिशत है। पद के दुरुपयोग में सजा का प्रतिशत 38 है तो आय से अधिक सम्पत्ति के मामलों में यह आंकड़ा मात्र 30 प्रतिशत ही है। इसके पीछे मुख्य कारण यही है कि इस आरोप को साबित करना पुलिस अधिकारी के लिए मुश्किल होता है।

पुलिस के लिए मुश्किल आय की गणना:
गुजरात में आय से अधिक सम्पत्ति के मामलों में आरोपी अधिकारी से पूछताछ से लेकर चार्जशीट बनाने तक सीए की मदद ली जाती है। इसी आधार पर राजस्थान में यह काम शुरू करने का निर्णय किया है। अधिकारी के पास मिली सम्पत्ति की गणना से लेकर उसकी आय की गणना करना एक पुलिस अधिकारी के लिए मुश्किल होता है। इससे कहीं अधिक मुश्किल किए गए दावे को अदालत में साबित करना होता है। ऐसे में एसीबी के लिए हमेशा मुश्किल रहती है।

सबसे कम दर्ज आय से अधिक सम्पत्ति के मामले:
वर्ष 2018 में 564 मामले दर्ज किए गए। इनमें से आय से अधिक सम्पत्ति के मात्र 12 मामले थे। अन्य मामले रंगे हाथ (ट्रैप) पकड़ने और पद के दुरुपयोग के थे। इसी तरह वर्ष 2019 में 356 मामलों में से आय से अधिक सम्पत्ति के 23 मामले हैं।

वित्तीय मामलों में सीए पैनल की मदद ली जाएगी। सीए की मदद फोरेंसिक ऑडिट कराने के साथ घोटालों की गुत्थी समझने में भी ली जाएगी। इसके लिए प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है।
आलोक त्रिपाठी, महानिदेशक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो

वर्तमान में आय से अधिक सम्पत्ति के मामले कई वर्ष तक लम्बित रहते हैं। 2015 में गिरफ्तार आइएएस अशोक सिंघवी के खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति का मामला दर्ज करने में ही चार वर्ष लग गए। यह मामला आय की गणना के बाद इसी वर्ष दर्ज किया गया है। वर्ष 2013 में गिरफ्तार आइपीएस राजेश मीना के खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति का मामला अभी भी एसीबी में लम्बित है।

Published on:
22 Dec 2019 08:54 am