जयपुर

dasha mata vrat 2021 दूर हो जाती है खराब ग्रह दशा, आ जाते हैं अच्छे दिन

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Apr 05, 2021
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जयपुर. चैत्र महीने की दशमी पर दशामाता का व्रत एवं पूजन किया जाता है। इस दिन महिलाएं कच्चे सूत का डोरा लाकर डोरे की कहानी कहती है तथा पीपल की पूजा कर 10 बार पीपल की परिक्रमा कर उस पर सूत लपेटती हैं। डोरे में 10 गठान लगाकर गले में बांधकर रखती हैं। मान्यता है कि चैत्र कृष्ण दशमी तिथि को दशामाता का व्रत एवं पूजन करनेवालों की दरिद्रता दूर हो जाती है।

माना जाता है कि जब मनुष्य की ग्रह दशाएं ठीक होती हैं तब उसके सभी कार्य अनुकूल होते हैं। जब ग्रह दशा प्रतिकूल होती है, तब बहुत परेशानी होती है। हर कदम पर विघ्न आते हैं, कोई कार्य पूरा नहीं होता। इन्हीं परेशानियों से निजात पाने के लिए हिन्दू धर्म में दशामाता की पूजा तथा व्रत करने का विधान है। चैत्र कृष्ण पक्ष की दशमी पर व्रत रखकर पूजा करने से खराब ग्रह दशा खत्म हो जाती है।

यह व्रत मुख्यत: सुहागिन महिलाएं रखती हैं। दशामाता के व्रत के दिन एक ही समय एक ही प्रकार का अन्न का सेवन किया जाता है। अन्न में खासतौर पर गेहूं का ही उपयोग किया जाता है। इस व्रत में भोजन में नमक नहीं डाला जाता है। खास बात यह है कि दशामाता का व्रत जीवनभर किया जाता है। इसका उद्यापन नहीं होता है। व्रत के प्रभाव से धीरे—धीरे ग्रह दशा सुधरने से जीवन में उन्नति होने लगती है।

Published on:
05 Apr 2021 03:31 pm
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