जयपुर

Death Highway of rajasthan : 30 दिन में 25 की गई जान, 963 की हड्डियां टूटी

Death Highway of Rajasthan: अंधाधुंध रफ्तार (Speed) , लापरवाही से वाहन चलाना, बिना हेलमेट दुपहिया की सवारी और सुरक्षा मापदंडों की अनदेखी से लगातार सड़क हादसे (Road Accident) हो रहे हैं। इस लापरवाही का नतीजा है कि जिले में 30 दिन में 25 लोगों की जान सड़क हादसों में चली गई। जबकि 963 लोगों की हड्डियां टूटने पर ट्रोमा सेंटर में उपचार के लिए भर्ती किया गया हैं। इनमें अधिकतर के शरीर में एक से ज्यादा फ्रैक्चर सामने आए हैं। निजी अस्पतालों में पहुंचे घायलों की संख्या इसमें शामिल नहीं है।

2 min read
Jan 31, 2023
Rishabh Pant Car Accident CCTV Footage see how pant's car burnt

Death Highway of Rajasthan: अंधाधुंध रफ्तार (Speed) , लापरवाही से वाहन चलाना, बिना हेलमेट दुपहिया की सवारी और सुरक्षा मापदंडों की अनदेखी से लगातार सड़क हादसे (Road Accident) हो रहे हैं। इस लापरवाही का नतीजा है कि जिले में 30 दिन में 25 लोगों की जान सड़क हादसों में चली गई। जबकि 963 लोगों की हड्डियां टूटने पर ट्रोमा सेंटर में उपचार के लिए भर्ती किया गया हैं। इनमें अधिकतर के शरीर में एक से ज्यादा फ्रैक्चर सामने आए हैं। निजी अस्पतालों में पहुंचे घायलों की संख्या इसमें शामिल नहीं है।

पीबीएम अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में जनवरी में इमरजेंसी और ट्रोमा विभाग में कुल 2555 घायल पहुंचे हैं। सभी सड़क हादसों में घायल होने पर उपचार के लिए लाए गए। घायलों में 53 ऐसे भी है जिनकी एक से पांच तक हड्डियां टूटी थी। महीने में 9 जने छत या ऊंचे स्थान से गिरकर घायल होने पर उपचार के लिए भर्ती हुए। इस लिहाज से प्रतिदिन औसतन 33 लोग घायल हुए हैं।

दोपहिया चालक अधिक घायल

अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक सड़क हादसों में सर्वाधिक घायल दोपहिया चालक या सवार होते हैं। तेज रफ्तार चलाना, हेलमेट न पहनना, ओवरटेक करना, आगे निकलने की होड़, हेलमेट न लगाना जैसे बड़े कारण सामने आए हैं। घायलों में 20 से 35 साल तक के लोगों का प्रतिशत सबसे ज्यादा है।

गायब है हाइवे गश्त और स्पीड चेकिंग

जिलें में राजमार्गों पर पुलिस की गश्त नजर नहीं आती है। रात के समय वाहनों की रफ्तार को ब्रेक लगाने वाला कोई नहीं है। इससे चालक अंधाधुंध रफ्तार से वाहनों को दौड़ाते है। यातायात पुलिस महज सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान छोटे-मोटे आयोजन कर इतिश्री कर लेती है। सुरक्षा के नाम पर केवल हेलमेट चेकिंग की जाती है।


हर साल बढ़ रहा मौत का आंकड़ा

पुलिस व परिवहन विभाग कि उदासीनता के चलते हर माह सड़क हादसे बढ़ रहे हैं। साथ ही हादसों में मरने व घायलों का ग्राफ ऊपर चढ़ रहा है। वर्ष 2020 से 2022 तक जिले में 2525 सड़क हादसे हुए। इनमें 2419 लोग घायल और 1603 की मौत हुई। जिला बीकानेर रेंज के आंकड़ों पर गौर करें तो बीकानेर जिलें में वर्ष 2022 में सड़क हादसों में 22.32 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

निजी अस्पतालों का आंकड़ा बहुत ज्यादा

जिले में करीब 500 से अधिक निजी अस्पताल और क्लीनिक हैं। 50 बड़े अस्पतालों में अलग से हड्डी रोग विभाग है। यहां अगर एक दिन में तीन घायलों का औसत भी लिया जाए तो यह 150 के करीब होते है। इस लिहाज से एक महीने का यह आंकड़ा 4350 को पार करता है। हादसों से हो रही मानवीय क्षति का यह एक अनुमान भर है।

Published on:
31 Jan 2023 07:58 pm
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