जयपुर

बच्चों को भीख और बालश्रम से मुक्त कराने के लिए अजय कर रहे ऐसे संघर्ष

हम बच्चों को भीख न दें, इसके बदले शिक्षा उन्हें सुनहरा भविष्य दें
2 min read
Jan 11, 2019
jaipur
बच्चों को भिक्षावृति और बालश्रम से मुक्त करने के लिए नगें पांव रह रहे अजय

दीपशिखा वशिष्ठ / जयपुर. जब भी किसी चौहारे पर बच्चों को भीख मांगते देखता हूं या फिर बालश्रमिक की घटनाएं सुनता हूं तो दिल मैं बहुत दर्द होता है कि यह देश का कैसा भविष्य है? इसलिए बच्चों को भिक्षावृति और बालश्रम के प्रति जागरुक कर उन्हें शिक्षा के लिए प्रेरित करना मेरा लक्ष्य है। यह कहना है पिथौरागढ़, उत्तराखंड निवासी 26 वर्षीय अजय ओली का।

अजय पेशे से मोटीवेशनल काउंसलर हैं, जो 2015 से भिक्षावृति और बालश्रम के प्रति जागरुक करने के लिए नंगे पैर रहते हैं। वो यात्राएं कर जागरुकता फैलाने का काम कर रहे हैं। अभी वो पटियाला से बाडमेर-दिल्ली की यात्रा कर रहे हैं और रोज 40 किलोमीटर पैदल चलते हैं। चड्ढीगढ़, लुधियाना होते हुए गुरुवार को वो जयपुर पहुंचे। यहां उन्होंने हवामहल, रेलवे स्टेशन और सिन्धी कैम्प पर लोगों को जागरुक किया। शुक्रवार को वो अजमेर में दो कॉलेज में लेक्चर देंगे। वर्ष 2015 में उन्होंने घनश्याम ओली चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी बनाकर गरीब बच्चों को शिक्षा देने का कार्य शुरु किया है। अजय का लोगों को संदेश है कि हम हम बच्चों को भीख न दें, इसके बदले शिक्षा का अवसर दे उन्हें सुनहरा भविष्य दें।

बिजनेस छोड़ कर रहे जागरुक, 2025 तक बालश्रमिक और बालभिक्षावृति मुक्त हो देश

अजय ने बताया कि 2025 में होटल मैनेजमेंट करने के बाद लखनऊ में वो इवेंट मैनेजमेंट का बिजनेस करते थे। एक दिन उन्होंने कु छ बच्चों को भिक्षावृति करते देखा तो उन्होंने बच्चों के माता-पिता से बात की और उन्हें पढ़ाने के लिए कहा। इस पर बच्चों के माता-पिता ने आर्थिक मजबूरी जताई। अजय ने उन बच्चों के पढ़ाई का बीड़ा उठाया। वहीं से उनके मन में यह बात बैठ गई कि ये बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं जो भिक्षावृति की भेंट नहीं चढ़ सकते। तभी से उन्होंने जूतेचप्पल पहनना छोड़कर नंगे पैर चलने का संकल्प लिया। अजय के पिता पूर्व सैनिक गिरीश ओली और मां घनेश्वरी देवी को अपने बेटे के इस काम पर नाज है।

कर चुके 80 हजार किलोमीटर की यात्रा

अजय अब तक करीब80 हजार किलोमीटर की यात्रा कर चुके, जिसमें से साढ़े बारह हजार किलोमीटर पैदल यात्रा की है। वो यात्रा के दौरान स्कूल-कॉलेज और भीड़ वाले जगहों पर युवाओं और बच्चों को देश को बालश्रमिक और भिक्षावृति से मुक्त करने का संदेश देते हैं। साथ ही शिक्षण संस्थाओं में होटल मैनेजमेंट पर लेक्चर और मोटीवेशनल स्पीच देते हैं। अब तक उनके साथ करीब 1200लोग जुड़ चुके हैं।

Published on:
11 Jan 2019 10:16 pm