जयपुर

Rajasthan Panchayat Election : मंत्री-विधायक तक रहे नेता भी उतरे पंचायत चुनाव मैदान में, जानिए कौन-कहां से उम्मीदवार?

Ex-Ministers and Ex-MLA in Panchayat Polls: राजस्थान पंचायत चुनाव में दिग्गजों की इंट्री। पूर्व मंत्री गफूर अहमद और कई पूर्व विधायकों ने जिला परिषद चुनाव के लिए ठोक ताल, जानिए पूरी सियासी कहानी।
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Oct 14, 2026
Rajasthan Panchayat Chunav Update
Rajasthan Panchayat Chunav - AI PIC

राजस्थान में आगामी पंचायती राज संस्थाओं और जिला परिषद चुनावों का मुकाबला अब बेहद दिलचस्प और हाई-प्रोफाइल होता जा रहा है। आमतौर पर जिला परिषद या पंचायत समिति के चुनावों को स्थानीय और नए नेताओं की सीढ़ी माना जाता है, लेकिन इस बार के चुनाव में राजनीतिक दलों ने ऐसे दिग्गजों को मैदान में उतार दिया है जो राज्य स्तर पर मंत्री और विधायक की कुर्सी संभाल चुके हैं। प्रथम चरण के चुनाव में देखें, तो पता चलता है कि बाड़मेर से लेकर डूंगरपुर तक, राज्य के कई जाने-माने सियासी चेहरे अब जिला परिषद सदस्य पद के लिए पसीना बहा रहे हैं। पूर्व मंत्रियों और पूर्व विधायकों के इस तरह अचानक मैदान में उतरने से इन सीटों पर मुकाबला बेहद कड़ा और रोमांचक हो गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन दिग्गजों के चुनाव लड़ने से न केवल स्थानीय कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा है, बल्कि ग्रामीण अंचलों की सियासत का पूरा समीकरण भी बदल गया है। आइए जानते हैं उन प्रमुख और दिग्गज नेताओं के बारे में जिन्होंने विधानसभा की चौखट लांघकर अब पंचायत चुनाव के मैदान में अपनी किस्मत आजमाने का फैसला किया है।

गफूर अहमद (पूर्व मंत्री): बाड़मेर की राजनीति का बड़ा नाम

 Gafoor Ahamad - File Pic

कांग्रेस पार्टी ने बाड़मेर जिला परिषद की वार्ड संख्या 15 से पूर्व मंत्री गफूर अहमद को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है और उन्होंने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। गफूर अहमद बाड़मेर जिले के सबसे वरिष्ठ और अनुभवी कांग्रेस नेताओं में गिने जाते हैं। वे पूर्व विधायक अब्दुल हादी के सुपुत्र हैं और पूर्व में राजस्थान सरकार में राज्यमंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

बाड़मेर-जैसलमेर क्षेत्र के अल्पसंख्यक मतदाताओं और ग्रामीण इलाकों में उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है। इससे पहले वे बाड़मेर जिला कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उन्होंने चौहटन विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर 1998 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में भारी अंतर से जीत दर्ज की थी। अब उनका जिला परिषद चुनाव लड़ना इस बात का संकेत है कि कांग्रेस ग्रामीण वोटर बेस को मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

पूंजीलाल परमार (पूर्व विधायक): डूंगरपुर के आदिवासी नेता मैदान में

Punjilal Parmar - File Pic

डूंगरपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व कांग्रेस विधायक पूंजीलाल परमार ने जिला परिषद के वार्ड संख्या 34 (पुनाली) से चुनाव मैदान में उतरते हुए अपना नामांकन पत्र भरा है। पूंजीलाल परमार डूंगरपुर जिले के एक कद्दावर आदिवासी नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ स्तंभ हैं। डूंगरपुर के ऐतिहासिक कांग्रेस विधायक नाथूराम अहारी के निधन के बाद पार्टी ने उन्हें आगे बढ़ाया था।

वे वर्ष 2006 में डूंगरपुर (ST) विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में शानदार जीत हासिल कर विधायक बने थे। उस चुनाव में उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी को 9,879 वोटों के बड़े अंतर से मात दी थी। स्थानीय पंचायती राज स्तर पर संगठन को धार देने के लिए उनका खुद जिला परिषद चुनाव लड़ना पार्टी के लिए एक बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

अनीता कटारा (पूर्व विधायक): सागवाड़ा से बीजेपी का कड़ा चेहरा

Anita Katara - File Pic

भारतीय जनता पार्टी ने भी इस मुकाबले में अपने मजबूत चेहरों को उतारा है। सागवाड़ा विधानसभा क्षेत्र की पूर्व भाजपा विधायक और पूर्व सांसद कनकमल कटारा की पुत्रवधू अनीता कटारा ने जिला परिषद के वार्ड संख्या 21 (भीलूड़ा) से भाजपा प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया है। अनीता कटारा डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा क्षेत्र की एक प्रमुख और प्रभावशाली महिला नेत्री हैं।

उन्होंने 2013 के विधानसभा चुनाव में एक युवा और उच्च-शिक्षित (M.A., B.Ed.) उम्मीदवार के रूप में अपनी पहली ही कोशिश में शानदार जीत दर्ज की थी। वह बेहद कड़े मुकाबले में कांग्रेस प्रत्याशी को मात्र 640 वोटों के अंतर से हराकर विधानसभा पहुंची थीं। उनका यह अनुभव जिला परिषद चुनाव में पार्टी के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

देवेंद्र कटारा (पूर्व विधायक): डूंगरपुर में फिर सक्रिय सियासी पारी

Devendra Katara- File Pic

डूंगरपुर विधानसभा क्षेत्र के एक और पूर्व भाजपा विधायक देवेंद्र कटारा ने वार्ड संख्या 6 (वेड) से जिला परिषद सदस्य के लिए अपना नामांकन दाखिल किया है। पेशे से वकील देवेंद्र कटारा ने 2013 की 'मोदी लहर' और वसुंधरा राजे के नेतृत्व के दौरान डूंगरपुर के पारंपरिक कांग्रेस गढ़ में कमल खिलाकर सबको चौंका दिया था। उन्होंने उस चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को 3,845 वोटों के अंतर से पराजित किया था।

वैचारिक और राजनीतिक सफर के दौरान कुछ समय आम आदमी पार्टी (AAP) में प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाने के बाद अब वे एक बार फिर स्थानीय ग्रामीण राजनीति में सक्रिय रूप से उतर आए हैं। इन तमाम दिग्गजों के मैदान में आ जाने से ग्रामीण मतदाताओं का रुझान किस ओर रहेगा, इस पर पूरे प्रदेश की राजनीतिक निगाहें टिकी हुई हैं।

Updated on:
14 Oct 2026 02:44 pm
Published on:
14 Oct 2026 02:44 pm