जयपुर मेट्रो में प्रतिदिन 50,000 से अधिक यात्री मेट्रो का उपयोग कर रहे हैं।
जयपुर मेट्रो में यात्रियों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। वर्तमान में प्रतिदिन 50,000 से अधिक यात्री मेट्रो का उपयोग कर रहे हैं। परकोटा क्षेत्र में मेट्रो सेवा शुरू होने के बाद इसमें उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले यह आंकड़ा प्रतिदिन 28,000 से 30,000 के बीच ही था। हालांकि, फेज-1 की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) में प्रतिदिन 1.12 लाख यात्रियों का अनुमान लगाया गया था, जो अब तक पूरी तरह से पूरा नहीं हो पाया है। फेज 2 की डीपीआर के अनुसार, वर्ष 2031 तक यह आंकड़ा 2.30 लाख तक पहुंचने की उम्मीद है और अगले 10 वर्ष में इसके चार लाख तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है।
जयपुर मेट्रो का उद्घाटन 3 जून, 2015 को हुआ था। शुरुआत में रोजाना का यात्री भार 51,552 रहा, लेकिन दिसंबर तक यह घटकर 21,975 रह गया। जनवरी 2016 में यह और घटकर 19,390, मार्च 2017 में 17,107 और दिसंबर 2017 में केवल 16.022 रह गया। इसकी वजह यह रही कि शुरुआती दिनों में लोग सिर्फ मेट्रो देखने आते थे। वहीं सितंबर 2020 में परकोटा क्षेत्र में मेट्रो संचालन शुरू हुआ, जिससे यात्री संख्या में फिर से वृद्धि होने लगी। हालांकि, डीपीआर में 2.1 लाख प्रतिदिन यात्रियों का अनुमान था, जो अब तक अधूरा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फेज-2 के कार्य पूरे होने के बाद मेट्रो में यात्रीभार में बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा। इस चरण में मेट्रो का विस्तार वीकेआइ, कलक्ट्रेट सर्कल, सवाई मानसिंह अस्पताल, रामबाग सर्कल, गांधी नगर स्टेशन और सीतापुरा तक किया जाएगा। इन इलाकों में प्रतिदिन लाखों लोगों की
आवाजाही होती है।
मार्च 2012 में फेज-2 की पहली डीपीआर बनाई गई, जिसमें वर्ष 2014 में 3.2 लाख, 2021 में 4.9 लाख और 2031 में 6.8 लाख यात्रियों का अनुमान था। लेकिन, नई डीपीआर में इन आंकड़ों को काफी कम कर दिया गया है। अब सवाल यह उठता है कि शुरुआती डीपीआर में यात्री भार को बढ़ा-चढ़ाकर क्यों पेश किया गया? क्या यह जानबूझकर किया गया था ताकि परियोजना को स्वीकृति मिल सके?