
Jaipur Ram Leela विभाजन के बाद जयपुर आए तो यहां भी शुरू की रामलीला, ... अब मंच सूने
— कोविड की मार... जयपुर में रहा रामलीला का इतिहास,
जयपुर। शहर में रामलीला (Jaipur Ram Leela ) का इतिहास (History) ऐतिहासिक रहा है। सवाई जयसिंह द्वीतीय के समय से राजधानी में शुरू हुई रामलीला की इस परंपरा ने लोगों को ऐसे जोड़ा कि शहर के विस्तार के साथ रामलीला का मंचन (staging) बढ़ता गया। स्थानीय लोगों के बाद मथुरा, वृंदावन से भी कलाकार आकर रामलीला को साकार करने लगे। आधुनिक दौर में भी बुजुर्ग से लेकर युवा को रामलीला मंचन का इंतजार रहता हैं, लेकिन कोविड के चलते इस बार भी शहर के रामलीला मंच सूने रहे। पुरुखों की शुरू की गई रामलीला की यह परंपरा दूसरी बार भी राजधानी में साकार नहीं हो पाई।
परिजनों व भक्तों ने मिलकर शुरू की रामलीला
पाकिस्तान के गुजरावाला से रामलीला की शुरुआत करने वाले कुछ लोग विभाजन के बाद भारत आए तो यहां रामलीला को जीवंत रखा। शुरुआत न्यू गेट पर होने वाली रामलीला में भागीदारी निभाकर की। इसके बाद जयपुर का विस्तार हुआ तो परिजनों व भक्तों ने मिलकर आदर्श नगर श्रीराम मंदिर प्रागंण में रामलीला का मंचन शुरू किया। श्रीराम मंदिर प्रन्यास व श्रीसनातन धर्म सभा के रामलीला प्रभारी केशव बेदी कहते है कि भगवान श्रीराम की आस्था वर्षों से जुड़ी है। विभाजन से पहले गुजरावाला में रामलीला का मंचन होता रहा। विभाजन के बाद पंजाबी परिवार जयपुर आए तो यहां न्यू गेट पर रामलीला मैदान में होने वाली रामलीला में उनके परिजन भी भागीदारी निभाने लगेे। इसके बाद 1955 में आदर्श नगर में श्रीराम मंदिर का निर्माण हुआ, तब से यहां रामलीला होती आई है। रामलीला के साथ यहां रावण दहन की परपंरा भी शुरू हुई।
सवाई जयसिंह द्वितीय के समय में भी होती थी रामलीला
जयपुर फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष सियाशरण लश्करी ने बताया कि रामलीला का इतिहास जयपुर स्थापना के समय से जुड़ा हुआ है। जयपुर स्थापना के समय से सवाई जयसिंह द्वितीय के समय से शहर में रामलीला होती आई है। इसके बाद न्यू गेट स्थित प्रदर्शनी मैदान में रामलीला शुरू हुईं, जिसके बाद इस मैदान का नाम ही रामलीला मैदान पड़ गया। यहां आजादी के पहले से ही रामलीला होती आ रही है।
बाहर से आने लगे कलाकार....
न्यू गेट रामलीला मैदान में रामलीला का इतिहास आजादी से पहले से जुड़ा हुआ है। रामलीला महोत्सव समिति महामंत्री प्रवीण बड़े भैया ने बताया कि आजादी से पहले से यहां रामलीला हो रही है। धीरे—धीरे रामलीला का स्तर बढ़ता गया। मथुरा व वृंदावन के कलाकार यहां आकर रामलीला करने लगे। जयपुर की रामलीला बाहर तक प्रसिद्ध होती गई। लेकिन कोविड के चलते पिछले साल से रामलीला बंद है। इस बार भी रामलीला नहीं हुई।
विस्तार के साथ बढ़ते गए मंच...
शहर के विस्तार के साथ रामलीला के मंच भी बढ़ते गए। जवाहर नगर में भी रामलीला शुरू हुई। पिछले दो दशक में शहर की कई कॉलोनियों में भी रामलीला शुरू हुई।