
जयपुर। विद्यार्थियों की कमी से जूझ रहे निजी मेडिकल कॉलेजों ने आखिरकार फीस में छूट का दांव चला और खाली सीटों की तस्वीर बदल गई। राजस्थान में नीट यूजी काउंसलिंग के तीसरे राउंड तक 1212 एमबीबीएस और बीडीएस सीटें खाली थीं। स्ट्रे वैकेंसी राउंड में कॉलेजों की ओर से विद्यार्थियों को विशेष छूट देकर आकर्षित करने के बाद 1064 सीटों पर प्रवेश हो गया है। अब 148 सीटें ही खाली बची हैं। इनमें 120 एमबीबीएस और 28 बीडीएस सीटें बताई गई हैं।
राजस्थान काउंसलिंग के स्ट्रे वैकेंसी राउंड में 1793 विद्यार्थियों के नाम प्रोविजनल कंबाइंड मेरिट लिस्ट में शामिल थे। ये सभी इस राउंड में भाग लेने के पात्र थे। इनमें से 1064 विद्यार्थियों को उनकी ओर से भरी गई कॉलेज चॉइस, श्रेणी के अनुसार उपलब्ध सीट और नीट अंकों के आधार पर एमबीबीएस या बीडीएस में प्रवेश मिला। जिन सीटों पर प्रवेश मुश्किल माना जा रहा था, वहां कॉलेजों ने अपने स्तर पर विद्यार्थियों से संपर्क कर विशेष छूट के जरिए प्रवेश के लिए प्रोत्साहित किया।
काउंसलिंग प्रक्रिया से जुड़े सूत्रों के अनुसार प्रवेश प्रक्रिया के दौरान कुछ निजी कॉलेजों की ओर से कम कीमत पर सीट उपलब्ध कराने के ऑफर दिए गए। इससे उन विद्यार्थियों को भी अवसर मिला, जिनके लिए मैनेजमेंट कोटे की अधिक फीस पर प्रवेश लेना मुश्किल था। इस साल कम नीट अंकों के साथ क्वालीफाई करने वाले विद्यार्थियों को भी बड़ी संख्या में प्रवेश मिला है।
नीट यूजी काउंसलिंग बोर्ड के चेयरमैन डॉ. बीएल कुमावत के अनुसार स्ट्रे वैकेंसी राउंड के बाद दो निजी कॉलेजों की 148 सीटें खाली रह गई हैं। अब इन सीटों पर प्रवेश के लिए अतिरिक्त राउंड होगा या नहीं, यह नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के निर्णय पर निर्भर करेगा। आयोग की अनुमति मिलने पर अतिरिक्त काउंसलिंग संभव है, अन्यथा सीटें खाली रह सकती हैं।
चिकित्सा शिक्षा विशेषज्ञ अतुल बापना के अनुसार राजस्थान में एमबीबीएस और बीडीएस की प्रवेश प्रक्रिया के बाद इच्छुक विद्यार्थियों को दूसरे राज्यों की काउंसलिंग और उपलब्ध रिक्त सीटों पर नजर रखनी होगी। वहीं, विदेश में मेडिकल शिक्षा के विकल्प भी उपलब्ध हैं। हालांकि, विदेश में प्रवेश लेने से पहले संबंधित संस्थान की मान्यता, भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए लागू राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के नियम, पाठ्यक्रम और अन्य पात्रता शर्तों की जांच जरूरी है। राजस्थान में आयुर्वेद और होम्योपैथी पाठ्यक्रमों की तीसरे राउंड की काउंसलिंग भी शुरू हो गई है। ऐसे में मेडिकल शिक्षा में प्रवेश चाहने वाले विद्यार्थियों के सामने उपलब्ध सीटों, फीस और पाठ्यक्रम के आधार पर विकल्प चुनने का अवसर बना हुआ है।