
सरकार ने महापौर, सभापतियों के अधिकार में कटौती कर दी है। लीज होल्ड से फ्री होल्ड के पट्टों पर अब निकाय प्रमुख के हस्ताक्षर नहीं होंगे। नगर निगमों में जोन उपायुक्त, नगर परिषद व नगर पालिकाओं में आयुक्त व अधिशासी अधिकारी ही इसके लिए अधिकृत होंगे। स्वायत्त शासन विभाग ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं। इस बदलाव के पीछे जिला कलक्टर मुख्य कारण रहे। प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत पिछले दिनों बैठक हुई। इसमें अफसरों ने साफ कर दिया कि निकाय प्रमुख के हस्ताक्षर की बाध्यता के कारण फ्री होल्ड पट्टा जारी करने में देरी हो रही है। सूत्रों के मुताबिक कई निकायों के प्रमुखों ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई है।
यह है फ्री होल्ड पट्टा
भूखंड के लीज होल्ड पट्टे का मतलब सरकार की ओर से भूखंडधारी को भूखंड 99 वर्ष की लीज पर दिया गया है। भूखंडधारी निकाय में अतिरिक्त राशि जमा कर लीज होल्ड पट्टे के बदले फ्री होल्ड पट्टा ले सकते हैं। फ्री होल्ड पट्टा का मतलब भूखंड का सरकार की ओर से दी गई लीज से पूरी तरह मुक्त होना है। जिसके नाम फ्री होल्ड पट्टा है उसका भूखंड पर हमेशा के लिए स्वामित्व रहेगा।
सीएम ने नाराजगी जताई तो अफसरों ने कारण गिनाए...
लीज होल्ड से फ्री होल्ड पट्टा जारी करने की फाइल निकाय प्रमुख तक जाती थी। महापौर, सभापति के हस्ताक्षर के बाद ही पट्टा जारी किया जाता था। पट्टा जारी करने में देरी पर नगरीय विकास मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक ने नाराजगी जताई। इसके बाद अफसरों की बैठकों का दौर शुरू हुआ। उन्होंने तर्क दिया कि निकाय प्रमुख के हस्ताक्षर की बाध्यता के कारण प्रकरण के निस्तारण में देरी हो रही है। जबकि ऐसे मामलों में भूखंड का पट्टा पहले ही जारी किया जा चुका होता है केवल राशि लेकर दूसर पट्टा जारी किया जाता है। इसके बाद बदलाव किया गया। नगर निगमों में जोन उपायुक्त, नगर परिषद व नगर पालिकाओं में आयुक्त व अधिशासी अधिकारी अधिकृत होंगे।