
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से पहले पूर्व सीएम वसुंधरा राजे से लेकर राज्यपाल कलराज मिश्र तक सड़कों पर मिल रहे विशेषाधिकार को कुछ दिन के लिए ही सही, लेकिन जनहित में संदेश दे चुके हैं।
ये भी पढ़ें : लाल बत्ती पर रुका राजस्थान के CM भजनलाल का काफिला, देखकर हैरत में पड़े लोग
दरअसल, मिनिस्ट्री ऑफ़ होम अफेयर्स (गृह मंत्रालय) की ओर से जारी दिशा निर्देशों के अनुसार कुछ प्रमुख शख्सियतों के वाहनों या काफिले को सड़कों से सुचारू रूप से निकालने के लिए विशेषाधिकार दिए गए हैं। इनमें भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विदेश से आए ख़ास मेहमानों (जिन्हें राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री स्तर की सुरक्षा मिलिया हो) शामिल हैं। ये विशेषाधिकार और छूट मिनिस्ट्री ने सेन्ट्रल सिक्यूरिटी एजेंसी के सुझावों को मानते हुए कई वर्षों पहले जारी किए थे, जो आज तक प्रभावी हैं।
ये भी पढ़ें : जयपुर को ट्रैफिक जाम से मिल सकती है राहत, बस इन बातों पर अमल की जरूरत
वीआईपी लोगों के वाहनों के सड़क पर सुचारू परिवहन को लेकर राज्यों के नियम भी प्रभावी रहते हैं, जिसमें प्रतिष्ठित व्यक्तियों की आवाजाही या अन्य किसी आवश्यक कारणों से ट्रेफिक रोकना या डाइवर्ट करने के अधिकार रहता है।
राजधानी जयपुर में कई बार ट्रेफिक जाम होने से गंभीर मरीजों को परेशानी हो रही थी। हालांकि कुछ मौकों पर मुख्यमंत्री के काफिले ने एंबुलेंस को रास्ता भी दिया गया। साथ ही जयपुर में पिछले कुछ समय से वीवीआइपी विजिट भी बढ़ी हैं। इसके कारण जेएलएन मार्ग और टोंक रोड सहित अन्य मार्गों पर जाम के हालात निरंतर बने रहते हैं।
पत्रिका के अभियान का बड़ा असर यह भी रहा कि परकोटे में अवैध ई-रिक्शा संचालन पर लगाम कसी और आम वाहन चालकों की राह आसान हो गई। परकोटे की सड़कें भी अब खुली-खुली नजर आने लगी हैं।