
....19 जिलों में शुरु होगा 'बेटी बचाओ—बेटी पढ़ाओं' अभियान
—दो दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम 11 जून से
जयपुर
राज्य सरकार की ओर से 'बेटी बचाओ—बेटी पढ़ाओं' योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिलाधिकारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए एक ट्रेनिंग प्रोग्राम निपसिड की ओर से दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। दो दिवसीय ये ट्रेनिंग प्रोग्राम 11 जून से शुरु होगा। इसमें प्रदेश के 19 नए जिलों को शामिल किया जाएगा। जहां पर इस योजना के तहत कार्यक्रम होना है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की मानें तो योजना के तहत चिन्हित सभी 19 जिलों से जिला स्तरीय अधिकारियों को इस संबंध में दिशा निर्देश जारी कर दिए गए है। ये अधिकारी योजना को प्रभावी रुप से जन—जन तक पहुंचाने और इसके प्रचार—प्रसार करने के प्रभावी गुर सीखेंगे। ट्रेनिंग लेने के बाद ये अधिकारी अपने—अपने क्षेत्रों में जाकर लोगों को अपनी बेटियों को पढ़ाने के लिए प्रेरित करेंगे। कन्या भ्रूण हत्या जैसे विषयों पर भी जागरुकता अभियान चलाएंगे। विभाग की ओर से पहले से चिन्हित ऐसे जिलों में जागरुकता कार्यक्रम चलाए जा रहे है जहां पर कन्या भ्रूण, लिंगानुपात में कमी आदि की घटनाएं अधिक होती रही है।
इन जिलों के अधिकारी लेंगे ट्रेनिंग—
बूंदी, जालौर, सिरोही, नागौर, पाली, कोटा, अजमेर, चूरु, राजसमंद, बाड़मेर, बीकानेर, झालावाड़, चित्तौड़गढ़,बांरा, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर, भीलवाड़ा और प्रतापगढ।
ये है बेटी बचाओ—बेटी पढ़ाओं योजना—
ये है बेटी बचाओ—बेटी पढ़ाओं योजना—
बेटी बचाओ—बेटी पढ़ाओं योजना की शुरुआत केंद्र की वर्तमान सरकार द्वारा लिंगानुपात में समानता लाने की दिशा में की गई है। 2001 की जनगणना में 0-6 वर्ष के बच्चों का लिंगानुपात का आंकड़ा 1000 लड़कों के अनुपात में लड़कियों की संख्या 927 थी। जो कि 2010 की जनगणना में घटकर 1000 लड़कों पर 918 लड़कियां हो गई। अत: इस गंभीर समस्या पर काबू पाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना को हरियाणा के पानीपत जिले में लागू करने की घोषणा की। उल्लेखनीय है कि देश के हरियाणा राज्य में लिंगानुपात की दर सबसे ज्यादा है।