
चेन्नई. वित्तीय दबाव और ठेकेदारों के लंबित बिलों के बीच ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन (जीसीसी) ने निजी निवेश के जरिए 30 एयर-कंडीशंड स्मार्ट बस शेल्टर और 10 फुट-ओवरब्रिज बनाने की योजना बनाई है। निगम आयुक्त जीएस समीरण ने बताया ये परियोजनाएं डिज़ाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर (डीबीएफओटी) और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर होंगी। निर्माण की पूरी लागत निवेशक वहन करेगा और विज्ञापन से निवेश की भरपाई करेगा। साथ ही उसे वार्षिक शुल्क और लाइसेंस शुल्क निगम को देना होगा। सूत्रों के अनुसार, 61 स्थानों पर स्मार्ट बस शेल्टर और 57 स्थानों पर एफओबीस के लिए संभावित जगहें चिन्हित की गई हैं। पहले चरण में 30 बस शेल्टर और 10 एफओबीस का निर्माण होगा। अंतिम स्थानों का चयन परामर्शदाता द्वारा व्यवहार्यता अध्ययन के बाद किया जाएगा।
कई सुविधाओं से होंगे लैस
प्रस्तावित स्मार्ट बस शेल्टरों में यात्रियों के लिए एयर-कंडीशनिंग, सीसीटीवी कैमरे, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट, पेयजल, मुफ्त वाई-फाई और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम से एकीकरण जैसी सुविधाएं होंगी। सीसीटीवी को निगम के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और पुलिस प्रणाली से जोड़ा जाएगा। पैनिक बटन लगाने पर भी विचार किया जा रहा है। फुट-ओवर ब्रिज के लिए 57 स्थानों में से 20 पर प्रारंभिक अध्ययन पूरा हो चुका है। परामर्शदाता इनका विस्तृत मूल्यांकन कर 10 सबसे उपयुक्त स्थानों की सिफारिश करेगा। इनका विकास भी विज्ञापन अधिकारों और अन्य राजस्व स्रोतों से किया जाएगा। निगम के पास 29 जुलाई तक 1,929 करोड़ रुपए के लंबित बिल हैं, जबकि 2026-27 में अनुमानित बिल 1,505 करोड़ रुपए होंगे। इस तरह कुल देनदारी 3,435 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है।