भाजपा में सबकुछ ठीकठाक नहीं है। आलाकमान के लाख प्रयासों के बावजूद अभी तक नेताओं के बीच दूरी कम होने का नाम नहीं ले रही है। पिछले हफ्ते प्रदेश कार्यसमिति की बैठक और सुभाष महरिया की पार्टी में वापसी कार्यक्रम से यह बात सामने आई है।
जयपुर। भाजपा में सबकुछ ठीकठाक नहीं है। आलाकमान के लाख प्रयासों के बावजूद अभी तक नेताओं के बीच दूरी कम होने का नाम नहीं ले रही है। पिछले हफ्ते प्रदेश कार्यसमिति की बैठक और सुभाष महरिया की पार्टी में वापसी कार्यक्रम से यह बात सामने आई है। अगर यह खींचतान कम नहीं हुई तो आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
दरअसल, इन दोनों ही जगहों पर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है। जिस दिन सुभाष महरिया की पार्टी में वापसी हुई, उस दिन राजे जयपुर में ही थीं, लेकिन वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुई। सीकर सांसद सुमेधानंद और किसान मोर्चा अध्यक्ष हरिराम रणवा भी इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। आपको बता दें कि 2014 में सुमेधानंद को टिकट देने की वजह से महरिया ने पार्टी छोड़ दी थी। उनकी वापसी से सुमेधानंद सहित सीकर के कई नेता—कार्यकर्ता खुश नहीं हैं।
कार्यसमिति की बैठक में भी नहीं आई राजे
पिछले दिनों लाडनूं में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक हुई थी। इसमें भी राजे शामिल नहीं हुई। जबकि मोदी सरकार के नौ साल पूरे होने वाले कार्यक्रमों के मद्देनजर इस बैठक का आयोजन किया गया था। बैठक में कार्यसमिति के ज्यादातर सदस्यों ने हिस्सा लिया।
कार्यकारिणी में नहीं हो पा रहा बदलाव
सीपी जोशी को प्रदेशाध्यक्ष बने दो महीने से ज्यादा वक्त बीत चुका है, लेकिन अभी तक प्रदेश कार्यकारिणी में कोई बदलाव नहीं हो पाया है। सूत्रों की मानें तो आलाकमान से चर्चा भी हो चुकी है, लेकिन पार्टी में चल रही खींचतान की वजह से जोशी बदलाव का कदम नहीं उठा पा रहे हैं।