राजस्थान की भाजपा सरकार की उपलब्धियों को लेकर कांग्रेस हमलावर है। कांग्रेस ने सरकार के दावों को जमीनी हकीकत से दूर बता है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि बीते दो वर्षों में प्रदेश ने सुशासन नहीं, बल्कि प्रचार, आंकड़ेबाजी और दिल्ली निर्भर सत्ता का दौर देखा है।
Two years of the Rajasthan government: जयपुर। राजस्थान की भाजपा सरकार के दो साल का कार्यकाल पूरा करने के मौके पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का कहना है कि भाजपा सरकार परिणाम देने वाली सरकार है। वहीं, भाजपा सरकार की उपलब्धियों को लेकर कांग्रेस हमलावर है। कांग्रेस ने सरकार के दावों को जमीनी हकीकत से दूर बता है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि बीते दो वर्षों में प्रदेश ने सुशासन नहीं, बल्कि प्रचार, आंकड़ेबाजी और दिल्ली निर्भर सत्ता का दौर देखा है। सरकार के दो साल पूरे होने पर 'राजस्थान पत्रिका' ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से विशेष बातचीत की।
जवाब: जनकल्याण योजनाएं अघोषित रूप से खत्म कर दी गईं। स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई है, राइट टू हेल्थ का लाभ नहीं मिल रहा। एसएमएस अस्पताल जैसे बड़े संस्थान में रिश्वतखोरी, आगजनी और गलत इलाज से मौतें हुई हैं। आरजीएचएस ठप है। न दवा है और न ही जांच हो रही है। महिलाओं और बुजुर्गों की पेंशन रुकी हुई है। निवेश के नाम पर केवल नौटंकी हुई है।
जवाबः सात वादे भी धरातल पर नहीं उतरे। अखबार रोज आंकड़ों की पोल खोल रहे हैं, लेकिन सत्ता के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
जवाब: पुलिस पीड़ितों की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं करती। जेल से धमकियां मिल रही हैं। बलात्कार के केस बढ़ रहे हैं।
जवाब: भाजपा जिन नियुक्तियों का ढोल पीट रही है, वे कांग्रेस सरकार के समय निकली भर्तियों का परिणाम हैं। 92 हजार नौकरियों का दावा किया जा रहा है, लेकिन कर्मचारी कहां हैं? सरकार नियुक्ति की तारीखें सार्वजनिक करे।
जवाबः हार के डर से सरकार चुनाव टाल रही है। कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है। गुटबाजी भाजपा में है।
जवाब: दो साल से 'अंधेर नगरी, चौपट राजा' का तमाशा चल रहा है। यहां सरकार, किरदार और पहरेदार… सब रील और प्रचार में व्यस्त हैं। सरकार दिल्ली, गुजरात और नागपुर की पर्चियों से चल रही है। मुख्य सचिव बदल गया और मुख्यमंत्री को खबर तक नहीं लगी।
जवाब: यूरिया खाद और बीज का सही वितरण नहीं हुआ। 12 हजार रुपए सम्मान निधि का वादा किया गया था, लेकिन 9 हजार दिए जा रहे हैं। एमएसपी पर बाजरा खरीदने से सरकार मुकर गई। आज 1.06 करोड़ किसानों पर 1.87 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है।