जयपुर

राजस्थान में सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक, CJP के आशुतोष रांका ने कहा- स्कूल ठीक करो या हमें गिरफ्तार करो

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति प्रवेश, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर शिक्षा विभाग ने रोक लगा दी है। आदेश के बाद CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर निशाना साधते हुए कहा कि जर्जर स्कूलों की स्थिति सुधारने तक निरीक्षण जारी रहेगा।
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Aug 17, 2026
Ashutosh Ranka and Madan Dilawar
Ashutosh Ranka and Madan Dilawar (Photo- IANS And Patrika)

जयपुर। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति प्रवेश और फोटो-वीडियोग्राफी को लेकर शिक्षा विभाग ने रुख सख्त कर लिया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार की ओर से जारी नए आदेशों के तहत अब बिना संस्था प्रधान (प्रिंसिपल) की पूर्व लिखित अनुमति के किसी भी बाहरी व्यक्ति का स्कूल परिसर में प्रवेश, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी या साक्षात्कार पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इस फैसले के बाद प्रदेश का सियासी पारा चढ़ गया है। विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था की बदहाली छिपाने का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है।

'आपकी सरकार, आपकी पुलिस… फिर भी निरीक्षण नहीं रोकेंगे'

शिक्षा विभाग के इस आदेश के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोला है। रांका ने ट्वीट कर कहा कि मदन दिलावर जी या तो राजस्थान के सभी जर्जर स्कूल ठीक करें, या फिर हम पर एडवांस में एफआईआर करवा दें। आप हमें एडवांस में गिरफ्तार भी कर सकते हैं। आपकी सरकार है, आपकी पुलिस है। लेकिन हम तब तक स्कूलों का निरीक्षण नहीं रोकेंगे जब तक राजस्थान के सभी स्कूल ठीक नहीं हो जाते।

कांग्रेस ने दी आंदोलन की चेतावनी

वहीं प्रदेश कांग्रेस ने भी सरकार पर सवाल उठाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि ऐसे निर्देशों से स्कूलों में पारदर्शिता और निगरानी प्रभावित हो सकती है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि अगर स्कूलों में सब कुछ ठीक है तो सरकार को किस बात का डर है? टूटे भवन, जर्जर कमरे, शिक्षकों की कमी और बच्चों की असुविधा की तस्वीरें सामने आने से सरकार असहज हो रही है। विद्यालय जनता के हैं, भाजपा की निजी संपत्ति नहीं। जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों की निगरानी को कमजोर करने वाला यह फैसला शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता के खिलाफ है।

शिक्षा विभाग के आदेश में क्या?

-प्रधानाचार्य या संस्था प्रधान की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी बाहरी व्यक्ति को विद्यालय परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी, केवल वे शासकीय अधिकारी अपवाद होंगे, जो अपने आधिकारिक दायित्वों के निर्वहन के लिए विधिवत अधिकृत हों।

-प्रत्येक आगंतुक विद्यालय परिसर में प्रवेश करने से पूर्व विजिटर रजिस्टर में अपनी प्रविष्टि करेगा।

-प्रधानाचार्य, किसी शिक्षक अथवा अधिकृत विद्यालय अधिकारी के साथ हुए बिना कोई भी बाहरी व्यक्ति कक्षा-कक्ष, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, छात्रावास, खेल मैदान, शौचालय अथवा विद्यार्थियों की किसी भी गतिविधि वाले क्षेत्र में प्रवेश नहीं करेगा।

-प्रधानाचार्य की पूर्व लिखित अनुमति के बिना विद्यार्थियों, शिक्षकों अथवा विद्यालय गतिविधियों का फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, साक्षात्कार, ऑडियो रिकॉर्डिंग अथवा लाइव स्ट्रीमिंग नहीं की जाएगी तथा यह केवल विधि सम्मत उद्देश्य के लिए ही अनुमन्य होगी।

-विद्यालय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि विद्यार्थियों के फोटो, वीडियो अथवा व्यक्तिगत जानकारी का ऐसा संग्रह, प्रकाशन अथवा प्रसार न हो जिससे उनकी निजता, गरिमा अथवा सुरक्षा प्रभावित हो।

-यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति प्रवेश करता है, परिसर छोड़ने से इंकार करता है, अनाधिकृत फोटोग्राफी / वीडियोग्राफी का प्रयास करता है अथवा विद्यालय के कार्य में बाधा उत्पन्न करता है, तो प्रधानाचार्य तत्काल स्थानीय पुलिस तथा जिला शिक्षा अधिकारी को सूचित करेंगे ताकि लागू विधियों के अंतर्गत आवश्यक कार्यवाही की जा सकेगी।

-प्रधानाचार्य किसी भी ऐसे आगंतुक का प्रवेश अस्वीकार कर सकते हैं। जिसकी उपस्थिति से सुरक्षा, निजता, अनुशासन अथवा शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होने की संभावना हो।

-प्रधानाचार्य की पूर्व लिखित अनुमति के बिना कोई भी आगंतुक व्यक्तिगत बालक-बालिका की जानकारी का संग्रह अथवा उसकी पहचान या छवि का प्रकाशन नहीं करेगा, जो गतिविधि बालक-बालिका के सर्वोत्तम हित में न हो तथा उससे उसकी सुरक्षा, गरिमा या निजता प्रभावित हो।

Updated on:
17 Aug 2026 10:36 am
Published on:
17 Aug 2026 10:36 am
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