
जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण में छोटे कस्बों का जोश बड़े शहरों पर भारी पड़ा। मतदान में छोटे शहरों ने बड़े नगर निगमों और परिषदों को पीछे छोड़ दिया। कई नगर पालिकाओं में वोटिंग 90 फीसदी के पार पहुंची, जबकि बड़े शहरों में मतदाताओं का उत्साह अपेक्षाकृत फीका रहा। कुल मिलाकर 162 नगरीय निकायों के 5,393 वार्डों में 76.41 फीसदी मतदान दर्ज किया गया।
पहले चरण में पार्षद के 5,393 पदों के लिए 20,623 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक हुआ। अब राजनीतिक दल और प्रत्याशी मतदान प्रतिशत के आधार पर अपने-अपने क्षेत्रों में चुनावी समीकरणों का आकलन करने में जुट गए हैं।
सबसे अधिक मतदान प्रतापगढ़ जिले की अरनोद नगर पालिका में दर्ज किया गया। यहां 91.98 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाला। इसके बाद भीलवाड़ा की बिगोद नगरपालिका में 91.85 प्रतिशत, धौलपुर की सैंपऊ नगरपालिका में 90.77 प्रतिशत और डीग की पहाड़ी नगरपालिका में 90.32 प्रतिशत मतदान हुआ। इन आंकड़ों ने छोटे कस्बों में मतदाताओं की सक्रियता को सामने रखा है। स्थानीय मुद्दों, प्रत्याशियों से सीधा जुड़ाव और मजबूत स्थानीय समीकरणों के कारण इन क्षेत्रों में मतदान को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया। इसके उलट बड़े शहरी निकायों में मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहा।
सबसे कम मतदान भीलवाड़ा नगर निगम में 63.84 प्रतिशत, अलवर नगर निगम में 64.60 प्रतिशत और डूंगरपुर नगर परिषद में करीब 65 प्रतिशत मतदान हुआ। इस तरह सर्वाधिक और न्यूनतम मतदान वाले निकायों के बीच करीब 30 प्रतिशत अंक का अंतर रहा।
पहले चरण में जयपुर जिले की दो नगर परिषद और 16 नगर पालिकाओं में भी मतदाताओं ने खूब उत्साह दिखाया। जिले में 3,90,378 मतदाताओं में से 3,33,875 ने वोट डाला। इस तरह मतदान प्रतिशत 87 फीसदी से ज्यादा रहा। कालाडेरा नगर पालिका में सर्वाधिक 89.91 प्रतिशत और सांभर नगर पालिका में सबसे कम 80.66 प्रतिशत मतदान हुआ। जिले में 565 मतदान केंद्रों पर 1,920 प्रत्याशियों के लिए मतदान हुआ। सुबह मॉकपोल के बाद मतदान शुरू होते ही कई बूथों पर कतारें लग गईं। महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। कुछ स्थानों पर ईवीएम में खराबी की शिकायत आई, लेकिन प्रशासन ने तत्काल मशीनें बदलकर मतदान सुचारू कराया।