जयपुर

राजस्थान निकाय चुनाव में बीजेपी-कांग्रेस को बगावत का डर! विवादित वार्डों के लिए बनाई खास रणनीति

Rajasthan Nikay Chunav 2026: नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने टिकट वितरण के साथ सिंबल को लेकर भी रणनीति बना ली है। दोनों दल विवादित वार्डों में प्रत्याशी घोषित होने के बाद होने वाली बगावत को सिंबल देने की टाइमिंग से नियंत्रित करना चाहते है।
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Updated: 29 Aug 2026, 10:05 AM IST
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congress vs bjp: मिशन-2028 से पहले रायपुर में BJP-Congress आमने-सामने(photo-patrika group)

जयपुर। नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने टिकट वितरण के साथ सिंबल को लेकर भी रणनीति बना ली है। दोनों दल विवादित वार्डों में प्रत्याशी घोषित होने के बाद होने वाली बगावत को सिंबल देने की टाइमिंग से नियंत्रित करना चाहते है। यही वजह है कि अधिकांश वार्डों में पहले नामांकन कराया जाएगा और अंतिम समय में प्रत्याशी को पार्टी का सिंबल दिया जाएगा। संभवतः 30 अगस्त से सिंबल वितरण शुरू होगा।

भाजपा ने संभागवार बैठकों में नाम तय कर जिलों को सिंबल भेजने शुरू कर दिए है, जबकि कांग्रेस शनिवार से जिला प्रभारियों को सिंबल के थैले सौंपेगी। अब दोनों दल नामांकन के दौरान बदलते स्थानीय समीकरणों और असंतोष पर नजर रखेंगे। भाजपा ने संभागवार मंथन के जरिए टिकट चयन की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है। गुरुवार को अजमेर, उदयपुर और बीकानेर संभाग के 117 निकायों के वार्डों पर चर्चा कर नाम तय किए गए। शुक्रवार को जोधपुर व कोटा के 69 निकायों के वार्डों पर मंथन हुआ।

दो दिन में पांच संभागों के 6205 वार्डों पर करीब 5750 वाडों के सिंबल जिलों में अधिकृत प्रभारियों को भेजे गए हैं। कुछ वार्डों में विवाद है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, संगठन महामंत्री अजेय कुमार और चुनाव प्रभारी हरीश द्विवेदी ने दावेदारों की जीत की संभावना पर फीडबैक लिया। जहां अधिक मजबूत दावेदार रहे, वहां नाम तय करने में खींचतान भी सामने आई। ऐसे वार्डों में पार्टी सिंबल देने में जल्दबाजी नहीं करना चाहती। जिलों में पहुंचे सिंबल उम्मीदवारों को कब दिए जाएं, यह स्थानीय स्तर पर तय होगा। इससे टिकट से वंचित दावेदारों को मनाने और संभावित बगावत रोकने का समय भी मिलेगा।

आखिरी वक्त खुलेंगे पत्ते

कांग्रेस ने जिला और विधानसभा स्तर से आए पैनलों पर प्रदेश स्तर पर मंथन शुरू कर दिया है। गुरुवार को करीब 40 जिलों की बैठकें हुईं, जिनमें जिला प्रभारी, सहायक प्रभारी और विधानसभा प्रभारी शामिल हुए। फीडबैक के आधार पर जमीनी पकड़ वाले और मजबूत दावेदारों को प्राथमिकता देने पर जोर रहा। टोंक के निवाई सहित कुछ स्थानों पर विवाद भी सामने आया।

पार्टी ने जरूरत पड़ने पर पड़ोसी वार्ड के मजबूत दावेदार को टिकट देने का विकल्प खुला रखा है। प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने शनिवार को शेष 10 जिलों की बैठक बुलाई है। बैठकों के बाद जिला प्रभारियों और सहायक प्रभारियों को सिंबल के थैले सौंपे जाएंगे। कांग्रेस की रणनीति साफ है, जहां नाम पर सर्वसम्मति है, वहां सिंबल पहले दिया जा सकता है, लेकिन विवादित वार्डों में अंतिम दिन तक इंतजार होगा। इससे नामांकन के दौरान उभरने वाले नए समीकरणों को देखने और असंतुष्ट दावेदारों को साधने का मौका मिलेगा।