
अरविन्द सिंह शक्तावत
जयपुर.
अरविन्द सिंह शक्तावत
जयपुर. राज्यसभा की चार सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान होगा। निर्दलीय प्रत्याशी सुभाष चंद्रा के मैदान में होने से चुनाव रोचक हो गया है, लेकिन राजस्थान में निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत का इतिहास बहुत बड़ा नहीं रहा है। प्रदेश के पिछले 32 साल के इतिहास में कई बार ऐसे मौके आए, जब निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन सिर्फ एक बार जीत दर्ज हुई। भाजपा के सहयोग से निर्दलीय ने बाजी मारी।
प्रदेश में 1991 के बाद निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत में लगातार कमी आई है। 1992 में राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी आरपी मोदी राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। भाजपा ने इन्हें समर्थन दिया था। इसके बाद कोई निर्दलीय राज्यसभा चुनाव नहीं जीता।
आठ साल में दो बार हुए चुनाव
वर्तमान राज्यसभा चुनाव को छोड़ दें तो 2014 से लेकर अब तक आठ साल में पांच बार राज्यसभा चुनाव हो चुके हैं। इन पांच चुनाव में दो बार ऐसा मौका आया, जब राज्यसभा चुनाव में वोटिंग हुई, लेकिन दोनों ही बार कोई निर्दलीय या अन्य दल का प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत पाया। 2016 में चार सीटों पर राज्यसभा चुनाव हुए थे। उस समय भाजपा ने चार प्रत्याशी उतारे, जबकि पूर्व राज्यसभा सांसद कमल मोरारका निर्दलीय मैदान में उतर गए। हालांकि, वे नहीं जीत सके। इसके बाद 2020 में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव हुए थे। इस चुनाव में भाजपा ने ओंकार ङ्क्षसह लखावत को उतार दिया था, लेकिन वे जीत नहीं पाए। वहीं, 2014, 2018 और 2019 में हुए राज्यसभा चुनावों में वोटिंग की नौबत नहीं आई।