
जयपुर। चार साल तक अपराध घटने का दावा करती रही राज्य सरकार के लिए पांचवां साल सामान्य नहीं रहा। अपराधियों पर पुलिस की पकड़ ढीली हुई और अपराध के आंकड़ों ने बढ़ोत्तरी की दिशा पकड़ ली। ज्यों-ज्यों साल गुजर रहा है, अपराध के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं।
अगस्त का ही हाल यह है कि हर तरह के अपराध बढ़े हैं। हालांकि पिछली सरकार के समय भी पांचवें साल में अपराध के आंकड़े बढ़े थे। राज्य में अगस्त तक 119384 मामले दर्ज हुए जबकि गत वर्ष अगस्त तक मात्र 116354 मामले दर्ज हुए थे।
गत वर्ष के मुकाबले डकैती की वारदात 90 प्रतिशत बढ़ी। बलात्कार के 40, बलवा के 35, अपहरण के 15 प्रतिशत मामले अधिक दर्ज हुए। वर्तमान सरकार के पांचवें साल यानी 2013 में भी ऐसा ही हाल सामने आया था।
आखिरी वर्ष में करीब 15 प्रतिशत अपराध अधिक दर्ज हुए थे। तब डकैती के 90, बलात्कार के 60, अपहरण के 53 प्रतिशत मामले अधिक दर्ज हुए थे।
कुछ घटनाएं बनती रही हैं चुनावी मुद्दा
हालांकि आंकड़े बढ़ें या घटें, अपराधों की दृष्टि से जिलों की रैंकिंग लगभग वैसी ही है। जो जिले शीर्ष 5 में थे, वे आज भी उसी स्थान पर हैं। इसीलिए चुनावी मुद्दा कुछ घटनाओं पर केन्द्रित रहता आया है। वर्ष 2015 में डांगावास में खूनी संघर्ष में 6 लोगों की मौत हो गई। जाति विशेष के लोगों पर हमले की इस घटना के बाद ध्रुवीकरण की आशंका बन गई थी।
जयपुर में अपराध सबसे ज्यादा
सर्वाधिक आपराधिक घटनाएं जयपुर में दर्ज होती हैं। इसके बाद अलवर, भरतपुर, उदयपुर, अजमेर का नम्बर आता है। जयपुर में यह चुनावी मुद्दा रहता आया है। अपराधों पर लगाम के लिए कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2011 में यहां कमिश्नरेट व्यवस्था लागू की थी। लेकिन दोनों ही शासन की स्थिति देखकर साफ है कि कमिश्नरेट व्यवस्था के अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। पुलिस को प्रो-एक्टिव होना चाहिए लेकिन वह केवल एक्टिव नज
र आती है। ऐसे में यहां की कानून-व्यवस्था संभालने वाले अधिकारी को राजनीतिक हमला भी झेलना पड़ता है। दो दिन पहले ही पुलिस अधिकारी के ससुराल में हत्या-लूट के बाद कानून-व्यवस्था को कठघरे में खड़ा किया गया।
इस बार प्रदेश में ये घटनाएं रहीं सबसे ज्यादा चर्चित
आनंदपाल : नागौर का आनंदपाल फरारी मामला सरकार के लिए आफत बना था। पेशी से लौटते समय पुलिस पर हमला कर आनंदपाल को उसके साथी भगा ले गए थे। आनंदपाल मुठभेड़ में मरा तो मामले ने मोड़ ले लिया। जाति विशेष ने सरकार के खिलाफ जैसे जंग छेड़ दी। सीबीआइ जांच के बाद प्रदर्शन भले ही शांत हुआ पर चुनावों पर असर की आशंका बरकरार है।
मॉब लिंचिंग : अलवर में मॉब लिंचिंग की २ घटनाएं हुईं। विपक्ष ने कानून-व्यवस्था पर सवाल किए। गृहमंत्री पुलिस अमला लेकर मौके पर पहुंचे पर अलवर में सत्तापक्ष के ही एक विधायक के बयानों से इसे राजनीतिक रंग मिला। मॉब लिंचिंग, सामराऊ उपद्रव, बच्चियों से बलात्कार, टोंक सहित अन्य स्थानों की साम्प्रदायिक घटनाओं का चुनावों में असर दिखने की आशंका है।
अपराध के आंकड़ो में ये जिले रहे शीर्ष पर
2013
जिला————————————कुल मामले
जयपुर————————————23878
अलवर————————————14677
भरतपुर————————————10203
अजमेर————————————8636
शांत जिले
जैसलमेर—————————————1434
सिरोही—————————————2148
डूंगरपुर—————————————2380
2017
जयपुर—————————————21288
अलवर—————————————12267
भरतपुर—————————————8672
उदयपुर—————————————6899
शांत जिलेे
जैसलमेर————————————1365
डूंगरपुर—————————————1757
प्रतापगढ़————————————1818
सिरोही—————————————1891