जिम्मेदार विभागों की अनदेखी और रख-रखाव के अभाव में अधिकांश प्लांट बंद पड़े हैं। पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि कई गांवों में लगाए गए आरओ प्लांट शुरू ही नहीं हो पाए।
सरहदी जैसलमेर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में फ्लोराइड युक्त पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए करीब पांच साल पहले लाखों रुपए खर्च कर लगाए गए आरओ प्लांट अब नकारा साबित हो रहे हैं। जिम्मेदार विभागों की अनदेखी और रख-रखाव के अभाव में अधिकांश प्लांट बंद पड़े हैं। पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि कई गांवों में लगाए गए आरओ प्लांट शुरू ही नहीं हो पाए।
रामदेवरा ग्राम पंचायत के राजस्व मावा गांव में लगाया गया आरओ प्लांट पिछले सात साल से बंद पड़ा है। छायण, एकां, सूजासर और आसपास के अन्य गांवों की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। इन प्लांट्स के चारों ओर झाडिय़ां उग आई हैं और ग्रामीण आज भी फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर हैं।
राज्य सरकार की योजना के अनुसार ग्रामीणों को मात्र दो रुपए में 20 लीटर शुद्ध और मीठा पानी उपलब्ध करवाने का प्रावधान था, लेकिन मशीन जांच, विद्युत आपूर्ति और जलापूर्ति पर ध्यान न देने के साथ कार्मिकों की नियुक्ति न होने से प्लांट नियमित रूप से संचालित नहीं हो पाए। जानकारों के अनुसार आरओ प्लांट की सफलता इसके निरंतर रख-रखाव पर निर्भर है। लेकिन गांवों में स्थापित अधिकांश प्लांट की हालत जर्जर हो चुकी है। टेंडर की सात साल की अवधि पूरी होने के बाद अब निजी फर्मों ने संचालन पूरी तरह बंद कर दिया है। विभागीय स्तर पर भी इन्हें पुन: शुरू करवाने को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई।
नए सिरे से होंगे टेंडर
जलदाय विभाग के अधिशासी अभियंता रामनिवास रैगर का कहना है कि निजी फर्मों की सात साल की अवधि पूरी हो चुकी है। अब नए सिरे से टेंडर होने के बाद ही इन आरओ प्लांट्स को शुरू किया जा सकेगा। तब तक ग्रामीणों को शुद्ध पानी का इंतजार करना पड़ेगा।