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Rajasthan Bus Fire: नाचना से अहमदाबाद जा रही बस में लगी भीषण आग, 1 यात्री की मौत, 9 लोग झुलसे

Bus Fire Incident: जैसलमेर में नाचना-अहमदाबाद निजी बस के एसी में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। धुआं फैलते ही यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई।
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Jaisalmer Bus Fire

नाचना-अहमदाबाद बस में भीषण आग (फोटो- पत्रिका)

Jaisalmer Bus Accident: जैसलमेर: सीमावर्ती जिले जैसलमेर से संचालित होने वाली निजी बसों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी यात्रियों के लिए काल साबित हो रही है। शुक्रवार सुबह राजस्थान-गुजरात सीमा पर एक निजी बस में लगी भीषण आग ने एक बार फिर यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राहत की बात यह रही कि समय रहते यात्रियों को बाहर निकाल लिया गया, जिससे एक बड़ी जनहानि टल गई। जानकारी के अनुसार, नाचना से अहमदाबाद के लिए हाल ही में शुरू की गई एक निजी बस सेवा शुक्रवार सुबह बड़े हादसे का शिकार होते-होते बची। बस अभी अपने संचालन के तीसरे दिन ही थी कि गुजरात के नेनावा गांव (धानेरा के पास) के निकट बस की एसी (AC) यूनिट में शॉर्ट सर्किट हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देखते ही देखते बस के भीतर जहरीला धुआं भर गया और आग की लपटें उठने लगीं। यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। चालक और परिचालक की तत्परता से सभी यात्रियों को आनन-फानन में बस से नीचे उतारा गया।

हालांकि, इस अफरा-तफरी में एक यात्री बुरी तरह झुलस गया, जिसे तुरंत धानेरा के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं, नौ यात्री झुलस गए हैं। बस में आग इतनी भीषण थी कि कुछ ही मिनटों में वाहन को भारी नुकसान पहुंचा। स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया है।

पुरानी यादें हुईं ताजा

शुक्रवार की इस घटना ने जैसलमेर के थैयात गांव के पास हुए उस रूह कंपा देने वाले हादसे की यादें ताजा कर दीं, जिसमें 19 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं, इलाज के दौरान मरने वालों का आंकड़ा 29 तक पहुंच गया था। जोधपुर और जयपुर की संयुक्त FSL टीम की जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि थैयात हादसे का मुख्य कारण भी एसी सिस्टम में शॉर्ट सर्किट ही था।

प्रशासनिक कार्रवाई और सुरक्षा पर सवाल

सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन ने पुराने हादसों से कोई सबक लिया है? शुक्रवार को नेनावा के पास हुई घटना यह दर्शाती है कि निजी बसों में 'जुगाड़' से लगाए गए एसी सिस्टम आज भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं।

परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि बसों की बॉडी निर्माण और एसी इंस्टॉलेशन के समय मानक वायरिंग का उपयोग न करना और आपातकालीन निकास का सुचारू न होना इन हादसों को 'हत्या' में बदल देता है।

नाचना-अहमदाबाद बस सेवा का तीन दिन में ही दुर्घटनाग्रस्त होना और थैयात हादसे की डरावनी रिपोर्ट का एक ही दिन सामने आना, जिले के परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरा प्रश्नचिह्न लगाता है। यदि समय रहते इन 'चलते-फिरते कफन' के विरुद्ध सख्त चेकिंग अभियान नहीं चलाया गया, तो थैयात जैसे हादसों की पुनरावृत्ति को रोकना असंभव होगा।