झालावाड़

Rajasthan Crime: हिस्ट्रीशीटर के बेटे ने छोड़ी परीक्षा, पिता के साथ चुनी अपराध की राह; कुछ ऐसे ही 37 मामले आए सामने

झालावाड़ जिले के एक लूट के मामले में 25 हजार रुपए के इनामी हिस्ट्रीशीटर की पुलिस को तलाश थी। उसके खिलाफ 15 संगीन आपराधिक मामले दर्ज थे।पुलिस ने उसके खेत में दबिश दी तो वह नाबालिग बेटे के साथ भाग निकला।
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Updated: 4 Sep 2026, 1:15 PM IST
Jhalawar Crime
हिस्ट्रीशीटर पिता को देखकर बेटे भी बने अपराधी। फोटो: एआई

झालावाड़। यह सच्ची घटना है। झालावाड़ जिले के एक लूट के मामले में 25 हजार रुपए के इनामी हिस्ट्रीशीटर सुगनचंद (परिवर्तित नाम) की पुलिस को तलाश थी। उसके खिलाफ 15 संगीन आपराधिक मामले दर्ज थे। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने उसके खेत में दबिश दी तो वह नाबालिग बेटे के साथ भाग निकला। भागते हुए दोनों सड़क पर पहुंचे। सुगनचंद ने पिस्टल दिखाकर एक कार रुकवाई और चालक से कार छीनकर फरार हो गया। चालक की शिकायत पर पुलिस ने पिता-पुत्र के खिलाफ लूट का मामला दर्ज कर लिया। इसके बाद पुलिस को बेटे की भी तलाश थी। कुछ दिनों बाद उसकी प्रतियोगी परीक्षा थी, लेकिन पुलिस के डर से वह परीक्षा देने नहीं गया। धीरे-धीरे वह भी पिता के साथ अपराध की राह पर चल पड़ा।

यह केवल सुगनचंद का मामला नहीं है। झालावाड़ जिले में पिछले कुछ सालों में ऐसे 37 मामले सामने आए है, जिनमें पिता के साथ उनके बेटे भी अपराध में लिप्त पाए गए। कहीं बेटे ने पिता का साथ देते देते अपराध की राह पकड़ी तो कहीं पिता की आपराधिक पहचान से प्रभावित होकर बेटे ने अपराध की दुनिया में कदम रखा। इन मामलों में कहीं पिता हिस्ट्रीशीटर है तो कहीं पुत्र। चौंकाने वाली बात यह है कि सभी 40 साल से कम उम्र के हैं।

पहला अपराध ही पिता के साथ

झालावाड़ पुलिस से उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण में नौ मामले ऐसे सामने आए, जिनमें बेटे ने अपने हिस्ट्रीशीटर पिता के साथ पहला अपराध किया। 20 मामलों में बेटा पिता के साथ वारदात में शामिल रहा। 17 मामलों में पिता हिस्ट्रीशीटर था, लेकिन बेटे ने उसके साथ अपराध नहीं किया और उसकी आपराधिक छवि से प्रभावित होकर अपराध की राह पकड़ी। 23 अपराधी ऐसे हैं, जिनके पिता के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज है।

इन बेटों के खिलाफ भी कई मामले

झालावाड़ शहर में बस स्टैंड के पास रहने वाला प्रिंस हरिजन [20] अपने पिता को देखकर अपराधी बना। उसके पिता उमेश के खिलाफ
विभिन्न थानों में 17 मुकदमे दर्ज थे। कुछ समय पहले उमेश की मौत हो गई। कोतवाली क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर फिरोज खान के बेटे फैजान खान उर्फ बिट्टू के खिलाफ चार प्रकरण दर्ज हैं। दांगीपुरा थाना क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर रंगलाल के बेटे संजय उर्फ संजय के खिलाफ पांच आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं।

बच्चे देखते हैं और सीखते हैं

मनोचिकित्सकों के अनुसार बच्चे का पहला स्कूल परिवार होता है। घर में बड़ों का व्यवहार, बातचीत और कानून के प्रति नजरिया उसके व्यक्तित्व को प्रभावित करता है। मारपीट, धमकी, विवाद या अवैध गतिविधियों को लगातार देखने से बच्चे के लिए ये व्यवहार सामान्य हो सकते हैं। परिवार में कानून के सम्मान और सही व्यवहार का माहौल जरूरी है।

इनक कहना है

अपराधशास्त्र मानता है कि पारिवारिक वातावरण व्यक्ति के व्यवहार को गहराई से प्रभावित करता है। बच्चा उपदेश से अधिक आसपास के आचरण से सीखता है। घर में हिंसा, कानून तोड़ना, अवैध कमाई और पुलिस-मुकदमो को सामान्य मानने से अपराध के प्रति नैतिक झिझक कम हो सकती है। हालांकि अपराध विरासत नहीं परिस्थितियों से सीखा व्यवहार हो सकता है। समाधान सकारात्मक पारिवारिक वातावरण, शिक्षा और सही संगति है।
-विवेक नंदवाना, वरिष्ठ अधिवक्ता

बच्चे अपने आसपास का माहौल बहुत जल्दी आत्मसात करते हैं। परिवार या संगति में अपराध सामान्य दिखाई दे तो बच्चे भी गलत राह पर जा सकते हैं। अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि बच्चों को कानून, अनुशासन और अच्छे संस्कारों का वातावरण दें। समय रहते सकारात्मक दिशा देना ही अपराध की अगली कड़ी को रोकने का प्रभावी उपाय है।
-अमित कुमार, पुलिस अधीक्षक झालावाड़

Updated on:
4 Sep 2026, 1:15 PM IST
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