
Kanpur District Magistrate: उत्तर प्रदेश के कानपुर में जिलाधिकारी के जनता दर्शन के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींच लिया। एक युवक अपने दादा के नाम दर्ज रिवॉल्वर का लाइसेंस वरासत के आधार पर अपने नाम कराने की मांग लेकर पहुंचा था। बातचीत के दौरान जिलाधिकारी की नजर उसके पान मसाला खाने पर पड़ी। इसके बाद डीएम ने लाइसेंस की प्रक्रिया के साथ एक ऐसी शर्त जोड़ दी, जिसकी चर्चा अब हो रही है।
नर्वल क्षेत्र के दीपापुर गांव निवासी अंकुर सिंह अपने 90 वर्षीय बाबा चंद्रभान सिंह के नाम दर्ज शस्त्र लाइसेंस को वरासत के आधार पर अपने नाम कराने के लिए जनता दर्शन में पहुंचे थे। उनका कहना था कि परिवार में पहले से शस्त्र लाइसेंस मौजूद है और उम्र अधिक होने के कारण वह इसे अपने नाम स्थानांतरित कराना चाहते हैं।
अंकुर से दस्तावेजों और लाइसेंस से जुड़ी जानकारी लेने के दौरान डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह की नजर उनके मुंह में पान मसाला होने पर गई। डीएम ने बातचीत के दौरान हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि ‘तुम्हारी पीक ही तुम्हारा हथियार है।’ इसके बाद उन्होंने युवक को पान मसाला छोड़ने की सलाह दी। डीएम ने कहा कि अगर वह शस्त्र लाइसेंस अपने नाम कराना चाहता है तो पहले पान मसाला छोड़ने का शपथ पत्र दे।
मामला सिर्फ युवक के शपथ पत्र तक सीमित नहीं रहा। जिलाधिकारी ने कहा कि अंकुर को अपनी पत्नी, पिता, बाबा और ग्राम प्रधान की ओर से भी शपथ पत्र लेकर आना होगा। इन दस्तावेजों के जरिए परिवार और स्थानीय स्तर पर उसके दावे की पुष्टि की जा सकेगी। डीएम ने स्पष्ट किया कि वरासत के आधार पर शस्त्र लाइसेंस का दावा करने के लिए जरूरी दस्तावेज और संबंधित लोगों के सत्यापन से जुड़े कागजात भी प्रस्तुत करने होंगे। यानी पान मसाला छोड़ने की शर्त के साथ लाइसेंस से जुड़ी सामान्य प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने पान मसाला छोड़ने की बात रखने के पीछे किसी तरह की कार्रवाई या दंड का उद्देश्य नहीं बताया। उन्होंने कहा कि युवक को यह सलाह इसलिए दी गई है ताकि वह इस आदत से बाहर निकल सके। डीएम के मुताबिक पान मसाला जैसी आदत से दूरी बनाने पर व्यक्ति की सेहत के साथ-साथ पैसे की भी बचत होगी। इसी सोच के साथ उन्होंने युवक से शपथ पत्र देने को कहा।
अंकुर सिंह ने बताया कि उनके बाबा चंद्रभान सिंह के नाम पहले से रिवॉल्वर का लाइसेंस है। उनकी उम्र करीब 90 वर्ष हो चुकी है। इसी आधार पर अंकुर ने लाइसेंस को वरासत के जरिए अपने नाम कराने की मांग की थी। अब उन्हें परिवार के सदस्यों और ग्राम प्रधान से संबंधित शपथ पत्र समेत जरूरी दस्तावेज जुटाने होंगे। इसके बाद ही लाइसेंस के हस्तांतरण संबंधी दावे पर नियमानुसार आगे की प्रक्रिया होगी। कानपुर के जनता दर्शन में सामने आया यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि शस्त्र लाइसेंस की प्रक्रिया के बीच डीएम ने एक युवक को पान मसाला छोड़ने की नसीहत देकर इसे स्वास्थ्य से जोड़ दिया। डीएम की यह पहल अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है।