
राजस्थान में पंचायती राज चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच करौली जिले से कांग्रेस पार्टी के भीतर जारी अंदरूनी खींचतान और भारी अंतर्कलह की खबर है। दरअसल, जिला परिषद चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन कांग्रेस की ओर से जारी की गई प्रत्याशियों की सूची के बाद पार्टी का यह अंदरूनी विवाद पूरी तरह सरेआम हो गया। हिंडौन से कांग्रेस की महिला विधायक अनीता जाटव ने अपनी ही पार्टी के जिला नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उनके विधानसभा क्षेत्र के दो जिला परिषद वार्डों के टिकटों का सौदा किया गया है। उनके इस बयान के बाद करौली कांग्रेस में दो विधायक आमने-सामने आ गए हैं और राजनीतिक पारे में अचानक उबाल आ गया है।
करौली जिला परिषद सदस्य पद के लिए नामांकन के अंतिम क्षणों में पार्टी ने सभी 35 वार्डों की एक साथ और साझा सूची जारी करने के बजाय जिले के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के हिसाब से टुकड़ों में प्रत्याशियों की घोषणा की। इस प्रक्रिया को लेकर विधायक अनीता जाटव ने असंतोष जताया है। उनका सीधा आरोप है कि भरतपुर संभाग से अनुसूचित जाति (SC) वर्ग की इकलौती महिला विधायक होने के बावजूद उनकी राजनीतिक अनदेखी की जा रही है और क्षेत्र में स्थानीय विधायक की सहमति के बिना टिकट बांटे जा रहे हैं।
विधायक अनीता जाटव ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी पीड़ा जाहिर की और सीधे तौर पर जिलाध्यक्ष तथा अन्य जिम्मेदार पदाधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया। अनीता जाटव ने बताया कि उनके हिंडौन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत जिला परिषद के कुल 7 वार्ड आते हैं, लेकिन उन्हें पार्टी की ओर से केवल 5 वार्डों के ही आधिकारिक सिंबल दिए गए।
उन्होंने बताया कि वार्ड नंबर 31 और वार्ड नंबर 33 के टिकटों को लेकर भारी गड़बड़ी की गई है। विधायक ने बिना किसी लाग-लपेट के सीधा आरोप लगाया कि इन दोनों वार्डों के टिकटों की पीछे से सौदेबाजी की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि इस अन्याय और भेदभाव के बारे में उन्होंने पार्टी के प्रदेश नेतृत्व और आलाकमान को उच्च स्तर पर पूरी तरह अवगत करा दिया है।
इस गंभीर आरोप और राजनीतिक विवाद के सामने आने के बाद जब कांग्रेस जिलाध्यक्ष एवं टोडाभीम से विधायक घनश्याम मेहर का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उनके मोबाइल पर संपर्क नहीं हो सका। टिकट वितरण में क्षेत्रवार सूची पेश किए जाने और विधायकों के बीच आपसी सामंजस्य की कमी को लेकर अब संगठन के भीतर भी सवाल उठने लगे हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत चुनावों से ठीक पहले इस तरह विधायकों के बीच खींचतान और सार्वजनिक रूप से टिकट बेचने के आरोप लगने से चुनाव मैदान में कांग्रेस प्रत्याशियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
विवाद और गहमागहमी के बीच जिला कलेक्ट्रेट में रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष कांग्रेस विधायकों, पूर्व विधायकों और पार्टी द्वारा अधिकृत पदाधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों के उम्मीदवारों की अंतिम सूची जमा कराई। कांग्रेस द्वारा घोषित उम्मीदवारों की सूची इस प्रकार है:
करौली जिले में जिला परिषद चुनाव के ठीक मुहाने पर इस तरह का सियासी घमासान सामने आने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित हुआ है। एक तरफ जहां बीजेपी पूरे जिले में लामबंद होकर चुनाव मैदान में उतर चुकी है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के दिग्गज नेताओं और विधायकों के बीच चल रही यह खींचतान चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। अब देखना यह होगा कि पार्टी आलाकमान विधायक अनीता जाटव की शिकायत पर क्या कदम उठाता है।