CG News: यूपीएससी में 556वीं रैंक हासिल कर उन्होंने पश्चिम बंगाल कैडर पाया। वर्तमान में वे दार्जिलिंग (प. बंगाल) में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (एडीएम) के रूप में पदस्थ हैं।
CG News: कोरबा जिले के पाली विकासखंड के छोटे से परसदा गांव से निकलकर सुरेश जगत ने इतिहास रच दिया है। वे छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद पहली बार आईएएस बनने वाले आदिवासी युवक हैं। वर्ष 2018 में यूपीएससी में 556वीं रैंक हासिल कर उन्होंने पश्चिम बंगाल कैडर पाया। वर्तमान में वे दार्जिलिंग (प. बंगाल) में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (एडीएम) के रूप में पदस्थ हैं। सुरेश की शिक्षा गांव के प्राथमिक स्कूल से शुरू हुई।
10वीं गांव के जनभागीदारी स्कूल और 12वीं बिलासपुर के भारत माता स्कूल से की, जहां वे प्रदेश मेरिट लिस्ट में पांचवें स्थान पर रहे। एनआईटी रायपुर से इंजीनियरिंग करने के बाद उनका चयन ओएनजीसी में हुआ, पर ज्वाइन नहीं किया। इसके बाद वे एनटीपीसी में तीन वर्ष, फिर आईईएस में तीन वर्ष कार्यरत रहे। 2016 में आईआरटीएस में चयन हुआ, जहां उन्होंने केवल ट्रेनिंग की। प्रशासनिक सेवा को लक्ष्य बनाकर उन्होंने सभी नौकरियां छोड़ दीं।
जगत ने बताया, मैंने बिना कोचिंग के लक्ष्य हासिल किया था। हिंदी मीडियम का छात्र होने के कारण मैंने यूपीएससी के दो अटैप्ट हिंदी में दिए। उन दिनों हिंदी के मटेरियल ऑनलाइन उपलब्ध नहीं रहा करते थे। इसलिए मुझे मजबूरन अंग्रेजी में स्वीच करना पड़ा। हालांकि स्कूल और कॉलेज स्तर तक लगातार मैंने अंग्रेजी को इंप्रूव किया था लेकिन परीक्षा देने के लिए आत्मविश्वास कम था। हिंदी में सफलता नहीं मिलने पर मैंने अंग्रेजी माध्यम से परीक्षा दी और चौथे अटैप्ट में आईएएस बना।