
कोरबा. जागरूकता अभियान के बीच पाली में रहने वाला ग्रामीण एक लाख रुपए की ठगी का शिकार हो गया। ठगों ने बैंक का कर्मचारी बनकर ग्रामीण को झांसे में लिया।
घटना के संबंध में बताया जाता है कि ग्राम बंगड़ी निवासी ग्रामीण 25 सितंबर को पाली स्थित भारतीय स्टेट बैंक गया था। उसने बैंक खाते का आधार से लिंक कराया। वहां से काम खत्म करके वापस घसर लौट रहा था। रास्ते में उसके मोबाइल पर कॉल आया। कॉलर ने खुद को बैंक अधिकारी बताते हुए ग्रामीण ने एटीएम कार्ड का नंबर पूछा। झांसे में आकर ग्रामीण ने कार्ड का नंबर और गोपनीय कोड बता दिया। एक दिन बाद 27 सितंबर को दोबारा बैंक पहुंचा। पता चला कि उसके खाते से एक लाख रुपए गायब है।
बैंक अफसरों ने ऑन लाइन ठगी की जानकारी दी। ग्रामीण पाली थाने पहुंचा। ग्रामीण का आरोप है कि पुलिस ने यह कहकर शिकायत दर्ज नहीं किया कि मामला साइबर सेल से जुड़ा है। इसकी शिकायत साइबर सेल में करें। ग्रामीण ने घटना की शिकायत साइबर सेल में की है। उसका आरोप है कि दोनों स्थान से मदद नहीं मिल रही है। इधर, पाली थाना प्रभारी मान सिंह राठिया ने बताया कि ग्रामीण ने ठगी की सूचना थाने को दी है।
इसी तरह दो दिन पहले भी ठग ने मोबाइल पर एटीएम कार्ड रिनीवल करने का झांसा दिया, इस पर बच्चे ने पिन नंबर दे दिया। पिता जब घर पहुंचा तब उसको मामला समझ में आ गया। एटीएम से जब देखा गया तब तक उसके खाते से 49 हजार से अधिक की रकम जा चुकी थी। मामला रजगमार कॉलोनी में रहने वाले एसईसीएल कर्मी ओम प्रकाश के साथ सामने आया। दरअसल उसके बेटे को एक कॉल आया जिसमें उसे भोपाल एसबीआई हेड क्वार्टर से किसी दीपक शर्मा बनकर युवक ने फोन किया। जिस पर उसने कहा कि एटीएम कार्ड रेनुवल कराना है। पिन नंबर चाहिए। कर्मी के पुत्र ने तत्काल पिन नंबर दे दिया। इसके बाद क्रमश: 1999, 8000, 1999, 1999, 9999, 16578 व 9000 करके कुल 49574 रूपए ठगों ने निकाल लिया था।