
Kota : रामगंजमंडी. धनिया में तेजी ने अभी तक के सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। इस क्षेत्र से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि दशकों पहले इसके भाव 12 हजार रुपए क्विंटल तक पहुंचे थे। वर्तमान में बादामी धनिया 15500 व इगल क्वालिटी का धनिया 16 हजार पार कर चुका है। रामगंजमंडी कृषि उपज मंडी धनिया की विशिष्ट श्रेणी की मंडी है। हाड़ौती संभाग के अतिरिक्त मध्यप्रदेश के सात जिलों से जुड़े गांवों में धनिया की होने वाली जिंस रामगंजमंडी में बिकने आती है। मंडी में धनिया की आवक फरवरी माह से शुरू हुई और पीक सीजन मार्च में तब सूखा धनिया 8000 रुपए क्विंटल तक बिका था। बादामी धनिया अभी 15500 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है। 9000 हजार रुपए क्विंटल बिकने वाले चालू रंगदार के भाव 16 हजार तक है, जो सीजन के समय से अभी तक दुगने से मामूली कम है।
धनिया बुवाई के प्रति किसानों का रुझान घटने और मांग निरंतर बनी रहने के कारण इसके भावों में तेजी बनी रही। दूसरा कारण लोंगिया रोग लगना व नाजुक फसल होने से किसानों का कम बुवाई करना है। वर्ष 2025 में 72 इंच बरसात हुई तो किसानों ने गेहूं, चना पर ज्यादा दांव लगाया। हाड़ौती संभाग के अन्य जिलों में भी किसानों ने धनिया की जगह लहसुन सहित अन्य जिन्स की बुवाई की। धनिया का रकबा ऐसे मे यहां काफी हद तक घट गया।
मई माह में बादामी धनिया 12 हजार से साढ़े 12 हजार तक बिका था। जून में यही साढ़े 13 हजार रुपए बिका। अक्टूबर में इसके भाव में एक साथ दो हजार रुपए की ओर तेजी आने से बादामी धनिया के भाव साढ़े पंद्रह हजार रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए।
रबी फसल की अब बुवाई का समय निकट है। किसान कम बरसात होने से किस फसल के प्रति अपना रुझान बनाते है। व्यापारियों की इस पर नजर रहेगी। बुवाई के आंकड़े जनवरी माह में सामने आने के बाद धनिया फसल के भावों का आगामी भविष्य तय होगा।
राजस्थान में सबसे अधिक धनिया कोटा संभाग (हाड़ौती क्षेत्र) में पैदा होता है। प्रमुख धनिया उत्पादक जिलों में कोटा है। यह धनिया उत्पादन में सबसे अग्रणी जिला है। यहां रामगंजमंडी एशिया की सबसे बड़ी धनिया मंडी के रूप में प्रसिद्ध है। फिर बारां, बूंदी, झालावाड़ आता है। राजस्थान का यह हाड़ौती क्षेत्र अकेले ही राज्य का लगभग 95 फीसदी और देश का 80 फीसदी से अधिक धनिया उत्पादित करता है।