
कोयला. तिसाया ग्राम पंचायत के खेड़लीकेशो गांव में वर्ष 1975 से पहले से संचालित स्कूल आज भी प्राथमिक स्तर तक का ही है। प्राथमिक शिक्षा के बाद अगर कोई आगे की पढ़ाई करना चाहता है तो उसे कोसों दूर जाना पड़ रहा है। ऐसे में कई बच्चे 5वीं के बाद या तो घर के काम करने लग जाते हैं या फिर मजदूरी क्योंकि यहां खेती और मजदूरी पर निर्भरता है। यहां बच्चों की संख्या भी 50 है और शिक्षक तीन है लेकिन स्कूल केवल पांचवीं कक्षा तक ही है। 5वीं के बाद खासकर बालिकाओं के लिए दूर के स्कूल जाना मुश्किल होता है। इससे वे पढ़ाई छोड़ देती हैं। उच्च प्राथमिक या माध्यमिक स्कूल दूर होने की वजह से कई बालिकाएं नहीं जाती।
बारां पढने जाते हैं कई बच्चे
यहां 5वीं के बाद स्कूल नहीं होने के कारण करीब 80 बच्चे बारां में पढने जा रहे हैं। मासूमों की राह में एक खाळ की रपट मुसीबत का सबब बनी हुई है। गांव के बाहर रपट पर पानी रहता है। बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए प्रशासन से तत्काल प्रभाव से रपट पर पुलिया निर्माण या पानी की निकासी का प्रबन्ध करने की मांग भी की है।
ये स्कूल उच्च प्राथमिक होना बहुत जरूरी है। यहां के बालक-बालिकाएं आगे की शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। वर्ष 1976 में उनका भी कक्षा एक में यहीं एडमिशन हुआ था। इससे पहले से संचालित है। स्कूल और बिल्डिंग भी बन कर तैयार है, कोई नई बिल्डिंग बनाने की जरूरत भी नहीं है।
हीरालाल मीणा, प्रधानाध्यापक, खेड़ली केशो विद्यालय