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लड़कियों के नाम से सिम खरीदकर करते थे साइबर ठगी, मास्टरमाइंड ने बेंगलुरु से सीखकर कोटा में लगाया सेटअप, 5 आरोपी गिरफ्तार

Rajasthan News: बेंगलूरु के कॉल सेंटर से साइबर ठगी का तरीका सीखकर मास्टरमाइंड ने कोटा में रिश्तेदारों के साथ मिलकर फर्जी कॉल सेंटर शुरू किया। आरोपी लड़कियों को नौकरी के नाम पर बुलाकर शेयर ट्रेडिंग के बहाने लोगों से ठगी करवाते थे और उनके नाम से सिम भी खरीदते थे।
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कोटा

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Akshita Deora

Aug 19, 2026

KOta Cyber Fraud gang busted

साइबर थाना पुलिस ने गिरफ्तार किए आरोपियों का फोटो: पत्रिका

Kota Cyber Fraud Gang Arrested: बेंगलूरु को देश का IT हब माना जाता है लेकिन अब साइबर ठगी के आरोपी वहां से ठगी का तरीका सीखकर दूसरे शहरों में अपना नेटवर्क खड़ा कर रहे हैं। जिसका खुलासा 7 अगस्त को गुमानपुरा इलाके में पकड़े गए साइबर ठगी के कॉल सेंटर की कार्रवाई में हुआ है। मास्टरमाइंड ने भी बेंगलूरु के कॉल सेंटर में काम करने के दौरान शेयर ट्रेडिंग के नाम पर लोगों से ठगी करने का तरीका सीखा। इसके बाद भोपाल, इंदौर और मुंबई में इसी नेटवर्क से जुड़कर अनुभव हासिल किया और कोटा आकर रिश्तेदारों के साथ मिलकर अपना कॉल सेंटर खड़ा कर दिया।

एसपी तेजस्वनी गौतम ने बताया कि 7 अगस्त को गुमानपुरा क्षेत्र में एक कॉल सेंटर पर कार्रवाई कर पुलिस ने मुख्य आरोपी मोहम्मद अशफाक (28) निवासी पालड़ी रनावता, थाना भोपालगढ़, जिला जोधपुर सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में सामने आया कि अशफाक पोस्ट ग्रेजुएट है और वर्ष 2020-21 में बेंगलूरु के एक कॉल सेंटर में काम करता था। यहीं उसने शेयर ट्रेडिंग के नाम पर साइबर फ्रॉड करने का तरीका सीखा है।

भोपाल में खोला कॉल सेंटर, पुलिस के डर से आया कोटा

एसपी ने बताया कि प्राथमिक जांच में सामने आया है कि बेंगलूरु के बाद आरोपी ने भोपाल के कॉल सेंटर में भी इसी तरह का काम किया। इसके बाद कुछ समय इंदौर और मुंबई में रहकर साइबर फ्रॉड से जुड़े नेटवर्क में काम किया। ठगी के तरीके और नेटवर्क की पूरी जानकारी होने के बाद उसने भोपाल में खुद का कॉल सेंटर भी शुरू किया। पुलिस की कार्रवाई के डर से करीब डेढ़ साल पहले वह कोटा आ गया और यहां नया सेटअप तैयार कर लिया। कोटा आने के बाद आरोपी ने स्थानीय प्लेसमेंट एजेंसी से संपर्क किया। इसके बाद गुमानपुरा में छावनी फ्लाई ओवर के पास ऑफिस किराए पर लिया। बाहर से यह ऑफिस सामान्य जॉब सेंटर जैसा दिखाई देता था, लेकिन अंदर से इसे साइबर ठगी के कॉल सेंटर के रूप में संचालित किया जा रहा था।

महिलाओं के नाम पर खरीदते थे भरोसा

एसपी ने बताया कि पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी महिलाओं की आवाज का इस्तेमाल कर लोगों को निवेश के नाम पर अपने जाल में फंसाते थे। आरोपी को पता था कि महिला की आवाज में बातचीत होने पर सामने वाला व्यक्ति ज्यादा आसानी से भरोसा कर सकता है। इसी वजह से प्लेसमेंट एजेंसी और ओएलएक्स के माध्यम से लड़कियों को नौकरी पर रखा गया। लड़कियों को सामान्य नौकरी, जैसे डेटा एंट्री और कस्टमर केयर के नाम पर बुलाया जाता था। बाद में उन्हें शेयर ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर लोगों से बातचीत करने के लिए तैयार किया जाता था। पुलिस के अनुसार, इसके लिए करीब सात दिन की ट्रेनिंग दी जाती थी। इस काम में इन्होंने लड़कियों के नाम से सिम खरीद भी की गई है।

5 आरोपियों को किया था गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी मोहम्मद अशफाक के साथ आवेश (18) निवासी बीकानेर, सैयद अली (24) निवासी नागौर, जावेद अली (22) निवासी नागौर और मजीद खान (35) निवासी जोधपुर को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने पूछताछ के बाद कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था।