कोटा की लोक अदालत ने चम्बल की बाईं और दाईं नहरों में कचरा डालने से प्रदूषित हो रहे पानी को लेकर संभागीय आयुक्त, जिला कलक्टर, सिंचाई विभाग के चीफ व सहायक अभियंता और नगर निगम आयुक्त को नोटिस जारी किए। साथ ही इन सभी से 27 जून तक जवाब मांगा है। यह नोटिस कुछ वकीलों की ओर से पेश याचिका पर जारी किए हैं।
वकील महिपालसिंह चौहान, सीताराम मुराडिया, अमरसिंह नरूका, लक्ष्मणसिंह हाड़ा, नरेन्द्र वैष्णव, कुलदीपसिंह जादौन, मनोज चौधरी और महेश कुमार शर्मा ने अदालत में याचिका पेश की। इसमें बताया कि नहर के आसपास रहने वाले लोग गंदगी, कचरा, केमिकल युक्त बेकार वस्तुएं, प्लास्टिक और अपशिष्ट पर्दाथ नहर में डालते हैं। इससे नहर का पानी तो दूषित होता है, साथ ही बहाव पर भी असर पड़ता है। सिंचित क्षेत्र में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता।
यह पानी डीसीएम व बारां जिले के अंता एनटीपीसी में फैक्ट्री भी उपयोग होता है। साथ ही सिंचाई व ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पीने में भी उपयोग लेते हैं। इस कारण लोग डिप्थीरिया, बाला रोग व पेट से संबंधित बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। दूषित पानी से लोगों की मृत्यु भी हो सकती है। याचिका में बताया कि शहरी क्षेत्रों में नहरों की दीवारे ऊंची नहीं है। लोग नहर में कूदकर आत्महत्या तक कर लेते हैं।
सिंचाई विभाग, नगर निगम और प्रशासन नहर की समय पर देखरेख नहीं करते। इनको जनता और शहर की गंदगी के निस्तारण से कोई मतलब नहीं है। याचिका में मांग की कि नहर की निचली सतह की सफाई कर मरम्मत करवाई जाए। साथ ही शहरी क्षेत्र में दीवारों की ऊंचाई बढ़ाई जाए। अभी यह कार्य नहीं होगा तो पानी छोडऩे पर मरम्मत नहीं हो पाएगी और गंदगी पानी के साथ बह जाएगी।