
Kanya Pujan Home Preparation: नवरात्रि में अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। इस अवसर पर छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका स्वागत किया जाता है और उन्हें भोजन कराने के साथ उपहार भी दिए जाते हैं। ऐसे में अगर आप भी घर पर कन्या पूजन करने की तैयारी कर रहे हैं, तो अष्टमी या नवमी से पहले कुछ जरूरी काम निपटा लेना बेहतर होता है। इससे कन्या पूजन वाले दिन किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। आइए जानते हैं कि कन्या पूजन से पहले घर में किन चीजों की तैयारी कर लेनी चाहिए।
कन्या पूजन के दिन बच्चियों को सम्मान के साथ घर पर आमंत्रित करें। उनके बैठने के लिए साफ और आरामदायक जगह तैयार रखें। इसके लिए घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई कर लें। साथ ही, कन्याओं के बैठने के लिए साफ आसन, चटाई या कपड़ा बिछाकर रखें। ध्यान दें कि बैठने की जगह ऐसी हो, जहां बच्चियां आराम से बैठ सकें और उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।
कन्या पूजन में हलवा, चना और पूरी का भोग बनाने की परंपरा है। ऐसे में अष्टमी या नवमी से पहले ही जरूरी सामग्री की सूची तैयार कर लें, ताकि पूजा वाले दिन कोई सामान छूट न जाए।
कन्या पूजन के दौरान बार-बार सामान ढूंढने से बचने के लिए पूजा की थाली और जरूरी सामग्री पहले ही एक जगह रख लें। इसमें रोली, हल्दी, अक्षत, कलावा, फूल, दीपक और घी शामिल कर सकते हैं। यदि आपके परिवार में कन्याओं के पैर धोने या पैर रंगने की परंपरा है, तो इसके लिए अलता, पानी और साफ तौलिया भी तैयार रखें। पूजा की सामग्री व्यवस्थित रखने से कन्या पूजन के समय जरूरी चीजें आसानी से मिल जाएंगी।
कन्या पूजन में भोजन के साथ कन्याओं को उपहार और दक्षिणा देने की परंपरा भी कई परिवारों में निभाई जाती है। ऐसे में आप अपने बजट के अनुसार पहले से गिफ्ट तैयार कर सकते हैं। जरूरी नहीं कि उपहार महंगा ही हो, बच्चियों के काम आने वाली छोटी चीजें भी चुनी जा सकती हैं।
उपहार चुनते समय बच्चियों की उम्र का ध्यान रखें। छोटी बच्चियों को ऐसी चीजें न दें, जिनके छोटे हिस्से निगलने का खतरा हो।
पूजा वाले दिन किसी तरह की उलझन से बचने के लिए अपने परिवार की परंपरा के अनुसार कन्या पूजन की विधि पहले ही समझ लें। सामान्य रूप से कन्याओं का स्वागत किया जाता है, तिलक लगाया जाता है, भोजन कराया जाता है और फिर उन्हें उपहार व दक्षिणा देकर विदा किया जाता है। कुछ परिवारों में पैर धोने के बाद अलता लगाने और कलावा बांधने की रस्म भी होती है। इन रस्मों का तरीका अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में भिन्न हो सकता है।
इसके साथ ही, कन्याओं को निमंत्रण भी पहले से दे दें, ताकि अष्टमी या नवमी के दिन उन्हें बुलाने में परेशानी न हो और पूजा की तैयारी समय पर पूरी हो सके। इसके अलावा, कई परिवारों में कन्याओं के साथ एक बालक को बटुक भैरव के प्रतीक के रूप में भोजन कराने की परंपरा भी निभाई जाती है। यदि आपके परिवार में यह परंपरा है, तो उसके अनुसार व्यवस्था कर सकते हैं।