
UP Cabinet Expansion Latest Update:उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर हलचल तेज हो गई है। बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, 10 मई तक कैबिनेट विस्तार को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है। यह विस्तार 2027 विधानसभा चुनाव से पहले आखिरी माना जा रहा है, इसलिए इसे रणनीतिक रूप से बेहद अहम बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, इस बार अधिकतम 6 नए मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है, जिसमें सहयोगी दलों के विधायकों को भी प्रतिनिधित्व देने पर विचार हो रहा है।
बीजेपी सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि विनोद तावड़े ने भाजपा के 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के विधायकों से मंत्री पद की दावेदारी ना करने को कहा गया है। पार्टी नेतृत्व युवा चेहरों और संतुलित सामाजिक समीकरणों के जरिए आगामी चुनावों की तैयारी करना चाहता है।
हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े का लखनऊ दौरा इन चर्चाओं को और हवा दे गया। हालांकि उनका दौरा निजी कार्यक्रम (शादी समारोह) के लिए बताया गया, लेकिन इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्रियों और कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की।
तावड़े की सबसे अहम बैठक प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह के साथ बंद कमरे में हुई। इस बैठक के बाद यह कयास और मजबूत हो गए कि कैबिनेट विस्तार को लेकर पार्टी लगभग अंतिम निर्णय की ओर बढ़ चुकी है।
राजनीतिक गलियारों में एक और उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की भी चर्चा है। बताया जा रहा है कि इस पर दिल्ली स्तर से विचार किया गया है, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसे जरूरी नहीं मानते। इसके बजाय मुख्यमंत्री सहयोगी दलों को प्रतिनिधित्व देने के पक्ष में हैं, ताकि चुनावी तालमेल और बेहतर हो सके।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने सहयोगी दलों से दो मंत्रियों को शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद आगामी चुनावों में गठबंधन को मजबूत बनाए रखना और जमीनी स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर दिल्ली में पहले ही उच्चस्तरीय बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों में कैबिनेट विस्तार के साथ-साथ संगठनात्मक बदलाव और विभिन्न निगम-मंडलों में समायोजन पर भी चर्चा की गई है। विनोद तावड़े ने इस संबंध में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी से फोन पर भी बातचीत की है।
लखनऊ में बैठकों का दौर पूरा करने के बाद विनोद तावड़े दिल्ली लौट चुके हैं। इस बीच पार्टी के पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान 2026 के तहत कार्यशालाएं भी जारी हैं, लेकिन फिलहाल राजनीतिक फोकस कैबिनेट विस्तार पर ही बना हुआ है।
हालांकि अभी तक पार्टी या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन बंद कमरों में चल रही बैठकों और चर्चाओं ने सियासी हलचल को चरम पर पहुंचा दिया है। अब सभी की नजर 10 मई पर टिकी है, जब यह साफ हो सकता है कि यूपी कैबिनेट में किन नए चेहरों को जगह मिलती है और किन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाता है।