Lok Sabha election results: फलोदी सट्टा बाजार ने मोहनलालगंज सीट पर नया अपडेट जारी किया हैं जिसमे समाजवादी पार्टी और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर हो रही हैं। कांग्रेस टक्कर से दूर दूर गायब हैं। इन्तजार की घड़ी अब समाप्त हो चुकी हैं सभी प्रत्याशियों की दिलो की धड़कन बढ़ी हुई हैं देखना हैं।
Phalodi Satta Market Update : लोकसभा चुनाव में मतदान की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है। आगामी 4 जून आज को एक साथ मतगणना शुरू हो रही हैं । ऐसे में प्रत्याशियों एवं उनके समर्थकों की धड़कनें तेज होती जा रहीं हैं। मोहनलालगंज लोकसभा क्षेत्र में वैसे तो कुल 11 प्रत्याशी चुनाव हैं। लेकिन मुख्य मुकाबला सपा प्रत्याशी आरके चौधरी और भाजपा के कौशल किशोर के बीच हैं। चुनाव बाद क्षेत्र में जो आंकड़े उभर कर सामने आ रहे हैं। उससे यही प्रतीत हो रहा है कि सपा और भाजपा के प्रत्याशी के मध्य सीधी मुकाबला है। जनता की राय लेने के बाद यह कहना उचित होगा कि मोहनलालगंज में हार-जीत का अंतर इस बार बहुत अधिक नहीं होगा। लोगों का मानना है कि यहां पर हार-जीत का अंतर 50 हजार वोटों के मध्य होगा। दोनों दलों के
प्रत्याशी और उनके समर्थक जीत का दावा कर रहे हैं। यदि मौजूदा सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री भाजपा प्रत्याशी कौशल किशोर जीतते है तो यह पार्टी के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। क्योंकि कांग्रेस के बाद यहां से कभी लगातार तीसरी बार जीत नहीं हुई है। इसलिए यह सीट भाजपा के लिए और महत्वपूर्ण है। सपा के लिए यह सीट प्रतिष्ठापूर्ण इसलिए है कि यह सीट सपा की परंपरागत सीट है। बसपा यहां से कभी भी जीत नहीं सकी है। सपा ने पूर्व मंत्री आरके चौधरी को अपना उम्मीदवार बनाया है। इस लिए यह सीट इनके लिए प्रतिष्ठापूर्ण है।
यदि सपा कैंडिडेट की जीत होती है तो उसके लिए यह किसी वरदान से कम नहीं होगा। सपा प्रत्याशी आरके चौधरी की यदि जीत होती है, तो पार्टी के लिए खुशी की बात होगी, क्योंकि दो बार से लगातार यहां से चुनाव हार रही है।
मोहनलालगंज सीट का इतिहास रहा है कि कांग्रेस से गंगा देवी ने लगातार तीन बार और सपा की रीना चौधरी ने लगातार दो बार एवं वर्तमान सांसद कौशल किशोर दो बार यहां से जीत हासिल की। इसके अलावा कोई भी वर्तमान सांसद चुनाव लड़ा हो उसे हार का ही मुंह देखना पड़ा है। फिर हाल यह कहना तो जल्दबाजी होगा कि कौन जीतेगा। लेकिन मोहनलालगंज में हुए कड़े चुनावी मुकाबले को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि सपा और भाजपा के प्रत्याशियों के बीच मुकाबला और हार-जीत का अंतर बहुत अधिक इस बार नहीं होगा।