
UP Election 2027: देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सोमवार सुबह लखनऊ पहुंचे। उनके साथ निर्वाचन आयोग का पूरा प्रतिनिधिमंडल भी राजधानी आया है। यह टीम दो दिन तक लखनऊ में रहकर चुनावी तैयारियों का जायजा लेगी। उत्तर प्रदेश में समय से पहले विधानसभा चुनाव कराए जाने की चर्चाओं के बीच यह दौरा अहम माना जा रहा है। ज्ञानेश कुमार 20 जिलों के अधिकारियों के साथ ही 120 विधानसभा सीटों के बूथ लेवल अधिकारियों से मतदाता सूची को लेकर सीधा संवाद करेंगे।
लखनऊ पहुंचने पर ज्ञानेश कुमार ने कहा कि यह शहर उनकी तपोभूमि रहा है और यहीं उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए आईआईटी चले गए। बहुत दिनों के बाद अपनी कर्मभूमि लखनऊ आया हूं। उन्होंने बताया कि बूथ लेवल अधिकारी लोकतंत्र की आधारशिला होते हैं, इसलिए उनसे सीधा संवाद जरूरी है। प्रदेश के स्कूल-कॉलेजों में चुनावी प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर भी अलग से कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
निर्वाचन आयोग की ओर से लखनऊ, मेरठ और वाराणसी में तीन क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इनमें पहला सम्मेलन सोमवार को लखनऊ में होगा। इसमें शाहजहांपुर, अयोध्या, बाराबंकी, सुलतानपुर, अमेठी, गोंडा, बहराइच, मैनपुरी, कानपुर नगर, कानपुर देहात, औरैया, इटावा, कन्नौज, प्रतापगढ़, लखनऊ, हरदोई, खीरी, रायबरेली, सीतापुर और उन्नाव समेत 20 जिलों के उप जिला निर्वाचन अधिकारी, डीआईओएस और मीडिया नोडल अधिकारी शामिल होंगे।
पहले दिन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कॉल्विन तालुकेदार्स कॉलेज सभागार में विद्यार्थियों से संवाद करेंगे । यह वही कॉलेज है जहां से ज्ञानेश कुमार ने खुद पढ़ाई की थी। छात्रों से बातचीत के बाद वे इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपिटर हॉल में आयोजित क्षेत्रीय सम्मेलन में शामिल होंगे।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त मंगलवार को आईजीपी सभागार में करीब 500 बूथ लेवल अधिकारियों के साथ संवाद करेंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी रणदीप रिणवा के अनुसार, इसके बाद मेरठ और वाराणसी में भी इसी तरह के क्षेत्रीय सम्मेलन होंगे। इस दौरे में ज्ञानेश कुमार के साथ वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग, डीजी मीडिया आशीष गोयल और डीजी आईटी डॉ. सीमा खन्ना समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।
उत्तर प्रदेश में पिछला विधानसभा चुनाव 2022 में फरवरी-मार्च के बीच सात चरणों में हुआ था। इससे पहले 2017 में भी चुनाव इसी अवधि में कराए गए थे। इस बार फरवरी में देशव्यापी जनगणना प्रस्तावित है। चुनाव और जनगणना, दोनों प्रक्रियाओं में शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों की बड़ी भूमिका होती है, जिस वजह से दोनों कार्यक्रम एक साथ कराना मुश्किल माना जा रहा है।
चूंकि जनगणना पूरे देश में एक साथ प्रस्तावित है, इसलिए राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव समय से पहले कराए जा सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए प्रमुख राजनीतिक दलों ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
शैक्षणिक रिकॉर्ड की बात करें तो ज्ञानेश कुमार ने 1979 में हाईस्कूल और 1981 में इंटरमीडिएट, दोनों परीक्षाओं में यूपी बोर्ड में पहला स्थान हासिल किया था। हाईस्कूल परीक्षा में करीब 10 लाख और इंटरमीडिएट में करीब 6 लाख विद्यार्थी शामिल हुए थे। इन दोनों बड़ी परीक्षाओं में टॉप करने वाले ज्ञानेश कुमार का लखनऊ दौरा इसलिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि यह उनके छात्र जीवन से सीधे जुड़ा है। फिलहाल आयोग की टीम अगले एक-दो दिन मेरठ और वाराणसी के सम्मेलनों की तैयारियों में जुटी रहेगी, जिसके बाद चुनावी कार्यक्रम को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।