
Divya Mishra Murder Case: लखनऊ के गोमतीनगर हत्याकांड में दिव्या मिश्रा की बहन प्रज्ञा मिश्रा ने जांच को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रज्ञा ने ‘डेढ़ करोड़ रुपये की एलिमनी’ मांगे जाने के दावे को गलत बताते हुए कहा कि एलिमनी और स्त्रीधन अलग-अलग कानूनी अवधारणाएं हैं। प्रज्ञा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि तलाक के केस में मुकदमे को 8 चरणों से होकर गुजरना पड़ता है। इस प्रक्रिया में नोटिस और जवाब, मध्यस्थता, काउंसलिंग, दोनों पक्षों की सुनवाई, समझौते का अवसर और अन्य कानूनी चरण शामिल होते हैं। प्रज्ञा मिश्रा के अनुसार, दोनों के बीच तलाक का मामला अभी कोर्ट में अपने शुरुआती दौर (लेवल 2 या 3) में ही था, जहां केवल मध्यस्थता और काउंसलिंग की प्रक्रिया चल रही थी। काउंसलिंग के निर्धारित 6 राउंड्स में से केवल 1 राउंड ही पूरा हो पाया था।
प्रज्ञा ने कहा कि जब मामला काउंसलिंग के स्तर पर ही था, तब एलिमनी तय होने या मांगने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने यह भी कहा कि दिव्या पद और आर्थिक स्थिति दोनों में ही आरोपी मानस से काफी आगे थी, इसलिए एलिमनी का मुद्दा केवल मेरी बहन की छवि को धूमिल करने के लिए उछाला जा रहा है।
प्रज्ञा ने कहा कि स्त्रीधन वह संपत्ति है जो महिला को शादी से पहले, शादी के समय या शादी के बाद मिलती है और उस पर महिला का अधिकार होता है। उन्होंने दावा किया कि दिव्या ने अपने स्त्रीधन से जुड़े दस्तावेजों में बिल और शादी की तस्वीरें कोर्ट में लगाई थीं।
हालांकि, मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि कितनी राशि के स्त्रीधन की मांग की गई है। अगर डेढ़ करोड़ के स्त्रीधन की डिमांड की गई है तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि दिव्या की शादी में कितना स्त्रीधन उसके मां बाप ने दिया होगा।
प्रज्ञा ने यह भी कहा कि दिव्या आर्थिक रूप से मानस से अधिक मजबूत थीं, इसलिए उनके मामले में ‘एलिमनी’ शब्द का इस्तेमाल कथित तौर पर बदनाम करने के लिए किया जा रहा है।
हत्याकांड पर सवाल उठाते हुए प्रज्ञा ने सीधे तौर पर किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा किया। उन्होंने सवाल किया कि जिस घर में एक सीधी लाठी तक नहीं थी, वहां अचानक दो पिस्टल और एक देसी तमंचा कहां से आए? जो शख्स बाजार से घर की मामूली सब्जियां तक ढंग से नहीं ला पाता था, उसे ये दुर्लभ हथियार किसने और कैसे मुहैया कराए? प्रज्ञा का सीधा आरोप है कि इस वारदात के पीछे कोई न कोई जरूर है, जिसने मानस को उकसाया और हथियारों का बंदोबस्त किया।
उन्होंने मानस के अंतिम स्टेटस में लिखे गए ‘चीट’ शब्द का भी जिक्र किया। प्रज्ञा का सवाल है कि अगर मानस को लगता था कि दिव्या उसे धोखा दे रही हैं, तो तलाक के मुकदमे में वह इस आधार को इस्तेमाल कर सकता था। ऐसे में यह जांच का विषय होना चाहिए कि स्टेटस में ‘चीट’ शब्द क्यों लिखा गया और क्या इसका उद्देश्य पुलिस को किसी दूसरी दिशा में ले जाना था।
प्रज्ञा ने बैंक और घर की दूरी का जिक्र करते हुए पूछा कि दिव्या की हत्या के बाद करीब 35 से 45 मिनट तक मानस कहां था। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या वह रास्ते में कहीं रुका था और अगर रुका था तो किससे मिलने गया था।उन्होंने यह संभावना भी उठाई कि क्या मानस के घर के भीतर कोई तीसरा व्यक्ति मौजूद था। साथ ही घर में प्रवेश और बाहर निकलने के किसी दूसरे रास्ते की भी जांच की मांग की।