
UP Education Department:उत्तर प्रदेश की 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा-2018 में आरक्षण संबंधी कथित विसंगति को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी है। न्याय की मांग कर रहे अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने एक बार फिर कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। अभ्यर्थियों के अनुसार, वे पिछले 53 दिनों से लखनऊ के ईको गार्डन में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
उनकी प्रमुख मांग है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण से जुड़े मामले का निस्तारण किया जाए और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर मिले। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अभ्यर्थियों को आरक्षण का समुचित लाभ नहीं मिलने से कई लोग प्रभावित हुए हैं। उनका आग्रह है कि संबंधित नियमों और आयोग के आदेश के अनुरूप परिणाम में संशोधन किया जाए। लंबे समय से लंबित इस मामले में अभ्यर्थी सरकार से स्पष्ट निर्णय और समयबद्ध कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे तूफान सिंह ने बताया कि 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती में आरक्षण से जुड़ी विसंगति को लेकर अभ्यर्थी कई वर्षों से न्याय की मांग उठा रहे हैं। उनके मुताबिक, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेश के अनुसार ओबीसी अभ्यर्थियों को आरक्षित श्रेणी का लाभ देते हुए 150 में से 60 अंक यानी 40 प्रतिशत के आधार पर परिणाम संशोधित किया जाना चाहिए। इसके बाद नियमों के तहत पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाए। अभ्यर्थियों ने दिव्यांगजन, भूतपूर्व सैनिकों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से संबंधित निर्धारित आरक्षण एवं अन्य पात्रता प्रावधानों का लाभ दिए जाने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में लागू नियमों के अनुरूप सभी संबंधित श्रेणियों के दावों की समीक्षा की जानी चाहिए। अभ्यर्थियों की मांग है कि आयोग के आदेश और लागू नियमों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करते हुए संशोधित परिणाम जारी किया जाए।
तूफान सिंह के अनुसार, कुछ दिन पहले ‘दस्तक दो अभियान’ के तहत अभ्यर्थियों ने कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के आवास पर पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। उस दौरान मंत्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वार्ता कर मामले के समाधान का प्रयास करने का आश्वासन दिया था। अभ्यर्थियों के मुताबिक, एक अक्टूबर को मंत्री ने मुख्यमंत्री से इस विषय पर बातचीत की थी। इस बातचीत के दौरान बेसिक शिक्षा मंत्री और प्रमुख सचिव, बेसिक शिक्षा से चर्चा कर समाधान की दिशा में कदम उठाने की बात कही गई थी। हालांकि, प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि इसके बाद भी उन्हें कोई ठोस निर्णय सामने आता नहीं दिखा। इसी वजह से अभ्यर्थियों ने दोबारा मंत्री से संपर्क कर मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
आंदोलन में सहयोग कर रहे अभ्यर्थी आशुतोष वर्मा ने बताया कि पिछली वार्ता के बाद लगभग 22 दिन बीतने पर भी अपेक्षित प्रगति नहीं होने के कारण प्रतिनिधिमंडल ने फिर से ओमप्रकाश राजभर से मुलाकात की। इस दौरान उन्हें ज्ञापन सौंपकर भर्ती में आरक्षण संबंधी विसंगति दूर कराने और पात्र अभ्यर्थियों को राहत दिलाने का आग्रह किया गया। अभ्यर्थियों के अनुसार, मंत्री ने ज्ञापन स्वीकार किया और मुख्यमंत्री के नाम पत्र भी लिखा। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वह इस मामले पर दोबारा बातचीत कर समाधान कराने का प्रयास करेंगे। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि सरकार संबंधित विभागों और अधिकारियों के साथ चर्चा कर लंबित मुद्दे पर निर्णय लेगी। हालांकि, मामले में अंतिम निर्णय और संशोधित परिणाम जारी होने की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
धरना प्रभारी नवीन चौधरी के अनुसार, मुलाकात के दौरान मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने आश्वासन दिया कि आरक्षण के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में कोई विसंगति पाई जाती है, तो उसे सुधारते हुए प्रक्रिया पूरी कराने का प्रयास किया जाएगा। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी मांग किसी नई व्यवस्था को लागू करने की नहीं, बल्कि भर्ती में आरक्षण से जुड़े मामले की नियमों के अनुसार समीक्षा और समाधान की है। वे चाहते हैं कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेश पर संबंधित विभाग स्पष्ट रुख अपनाएं और यह तय हो कि प्रभावित अभ्यर्थियों को किस प्रकार राहत दी जा सकती है। उनके मुताबिक, नियुक्ति से जुड़ा मामला लंबे समय से लंबित होने के कारण उनके भविष्य पर असर पड़ रहा है।
अभ्यर्थियों के अनुसार, लखनऊ के ईको गार्डन में उनका धरना लगातार 53 दिनों से जारी है। वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। धरना स्थल पर अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक आरक्षण संबंधी विसंगति पर निर्णय नहीं होता, तब तक वे अपनी मांग उठाते रहेंगे। उनकी प्रमुख मांगों में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेश पर कार्रवाई, भर्ती परिणाम का नियमानुसार संशोधन और सभी पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर देना शामिल है। अभ्यर्थियों ने सरकार से आग्रह किया है कि संबंधित दस्तावेजों और नियमों की समीक्षा कर मामले का जल्द निस्तारण किया जाए, ताकि वर्षों से इंतजार कर रहे लोगों को स्थिति स्पष्ट हो सके।
68,500 सहायक अध्यापक भर्ती से जुड़ा यह मामला अब एक बार फिर मंत्री स्तर पर पहुंचा है। प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपकर सरकार से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है। अभ्यर्थियों की ओर से रखे गए दावों और मांगों पर संबंधित विभागों की आधिकारिक प्रतिक्रिया तथा आयोग के आदेश के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट होना आगे की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण होगा। ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में तूफान सिंह, नवीन चौधरी, आशुतोष वर्मा, मोहित कुमार सहित अन्य अभ्यर्थी शामिल रहे। अभ्यर्थियों ने दोहराया कि वे आरक्षण संबंधी विवाद का नियमसम्मत समाधान और पात्रता के आधार पर नियुक्ति चाहते हैं। अब उनकी निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई और मामले में होने वाली आधिकारिक प्रगति पर हैं।