
Yogi government schemes: शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां दुर्गा के अष्टम स्वरूप मां महागौरी की आराधना करते हुए प्रदेश की नारी शक्ति के सम्मान, सुरक्षा, स्वावलंबन और समृद्धि के संकल्प को दोहराया। मुख्यमंत्री ने मां महागौरी को शांति, पवित्रता और करुणा का प्रतीक बताते हुए कहा कि समाज की वास्तविक उन्नति तभी संभव है, जब हर मां स्वस्थ और सुरक्षित हो, हर बेटी को समुचित पोषण एवं बेहतर भविष्य मिले और प्रत्येक नारी सम्मान के साथ आत्मनिर्भर जीवन व्यतीत कर सके। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में नारी शक्ति का जीवन सुरक्षा, सम्मान, सामर्थ्य और समृद्धि से आलोकित हो रहा है। प्रदेश सरकार महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने रविवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर मां महागौरी की आराधना के संदर्भ में नारी सशक्तिकरण और प्रदेश सरकार की विभिन्न पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश की डबल इंजन सरकार ने महिलाओं को केवल कल्याणकारी योजनाओं का लाभार्थी बनाने तक अपनी भूमिका सीमित नहीं रखी, बल्कि उन्हें प्रदेश की प्रगति का सक्रिय भागीदार बनाने की दिशा में भी काम किया है। सुरक्षा, सम्मान, पोषण, शिक्षा और आर्थिक स्वावलंबन के अवसरों का विस्तार कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी प्रदेश की वास्तविक प्रगति का आकलन वहां की महिलाओं की स्थिति, उनके अधिकारों, अवसरों और आत्मनिर्भरता के आधार पर किया जाना चाहिए। महिलाएं जब सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करती हैं, अपने कौशल का विकास करती हैं और आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी निभाती हैं, तब इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। इसी सोच के साथ प्रदेश सरकार ने महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और उन्हें विकास के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ाने के लिए अनेक पहल की हैं।
उन्होंने नारी शक्ति को सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक विकास की महत्वपूर्ण आधारशिला बताते हुए कहा कि महिलाओं की भागीदारी के बिना समृद्ध उत्तर प्रदेश की परिकल्पना पूरी नहीं हो सकती। सरकार का प्रयास है कि महिलाओं को अपनी क्षमता और प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर मिले। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार, वित्तीय सेवाओं और सामुदायिक नेतृत्व से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय बच्चों के पोषण से जुड़ी व्यवस्था अनेक समस्याओं से जूझ रही थी। उनके अनुसार, प्रदेश में डबल इंजन सरकार बनने के बाद टेक होम राशन के उत्पादन और वितरण की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सौंपने की पहल की गई। इससे व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ ही महिलाओं के लिए आर्थिक स्वावलंबन के नए अवसर तैयार करने का प्रयास किया गया।
इस पहल का उद्देश्य बच्चों और जरूरतमंद लाभार्थियों तक पोषण से जुड़ी सेवाओं को बेहतर ढंग से पहुंचाने के साथ महिलाओं को उत्पादन, प्रबंधन और वितरण जैसी गतिविधियों से जोड़ना भी है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से उन्हें सामूहिक रूप से काम करने, अपनी कार्यक्षमता विकसित करने और आय के अवसर प्राप्त करने का मंच मिला है। मुख्यमंत्री ने इसे पोषण सेवाओं को सुदृढ़ करने और कुपोषण के विरुद्ध प्रयासों को प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य जागरूकता और प्रारंभिक शिक्षा में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री ने उनके मानदेय में वृद्धि का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय ₹3,000 से बढ़ाकर ₹12,000 प्रतिमाह किया गया है। यह वृद्धि उनके योगदान को प्रोत्साहित करने और आर्थिक स्थिति को मजबूती देने के उद्देश्य से किए गए प्रयासों में शामिल है।
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं तक पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समुदाय तथा सरकारी सेवाओं के बीच संपर्क स्थापित करने में भी उनका योगदान अहम है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मानदेय वृद्धि के साथ स्वास्थ्य बीमा का लाभ देने पर भी ध्यान दिया गया है, ताकि इन कार्यकत्रियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक कल्याण को सहारा मिल सके। सरकार का जोर ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर है, जिसमें जमीनी स्तर पर सेवाएं देने वाली महिलाओं को उनके योगदान के अनुरूप सहयोग मिल सके।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन महिलाओं के लिए आय और उद्यमिता का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। बलिनी, सामर्थ्य, काशी, बाबा गोरखनाथ और सृजनी जैसी दुग्ध उत्पादक कंपनियों से जुड़कर 31 जनपदों की चार लाख से अधिक महिलाएं इस क्षेत्र में योगदान दे रही हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इन कंपनियों से जुड़ी महिलाएं दुग्ध उत्पादन के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान कर रही हैं। दुग्ध उत्पादन ग्रामीण परिवारों के लिए नियमित आय का अवसर उपलब्ध कराने कीक्षमता रखता है। इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से उन्हें सामूहिक उद्यम, उत्पादन और विपणन से जुड़ने का अवसर मिलता है। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और महिलाओं की निर्णय लेने की क्षमता मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने और बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए बीसी सखी पहल का भी मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में बीसी सखी पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। बीसी सखी के रूप में महिलाएं ग्रामीण समुदायों तक बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं पहुंचाने में सहयोग करती हैं। इससे उन लोगों को सुविधा मिलती है, जिन्हें बैंकिंग सेवाओं के लिए दूर जाना पड़ता है। साथ ही, इस व्यवस्था के माध्यम से महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार का अवसर भी विकसित होता है। गांवों में वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता बढ़ने से सरकारी योजनाओं के लाभ, बैंकिंग लेनदेन और वित्तीय जागरूकता को प्रोत्साहन मिल सकता है।
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि प्रदेश में 1 करोड़ 20 लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई गाथा लिख रही हैं। स्वयं सहायता समूह महिलाओं को सामूहिक प्रयासों के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी का अवसर उपलब्ध कराते हैं। इनके जरिए महिलाएं बचत, ऋण, छोटे उद्यम, उत्पादन और विपणन जैसी गतिविधियों से जुड़ सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने से परिवारों की आय को सहारा मिलता है और समाज में उनकी भूमिका भी मजबूत होती है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं अपने कौशल का उपयोग कर स्वरोजगार के अवसर तलाश रही हैं। समूह आधारित गतिविधियां महिलाओं में सहयोग, नेतृत्व और सामूहिक निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में भी सहायक हो सकती हैं। प्रदेश सरकार का प्रयास इन समूहों को आजीविका के बेहतर अवसरों से जोड़कर महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है।
महिलाओं को नियमित आय और आर्थिक समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए लखपति दीदी पहल का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल के माध्यम से महिलाएं अपनी मेहनत और हुनर को आर्थिक प्रगति में बदल रही हैं। इसका उद्देश्य महिलाओं को आजीविका के ऐसे अवसरों से जोड़ना है, जिनसे उनकी आमदनी बढ़े और वे अपने परिवार की खुशहाली में अधिक योगदान दे सकें।
स्वरोजगार, छोटे उद्यम और कौशल आधारित कार्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जब महिलाओं के पास अपनी आय के साधन होते हैं, तो वे परिवार की आवश्यकताओं, बच्चों की शिक्षा और भविष्य की योजनाओं से जुड़े निर्णयों में अधिक प्रभावी भागीदारी निभा सकती हैं। इस प्रकार महिला सशक्तीकरण का लाभ केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार और समुदाय के विकास में दिखाई देता है।
मुख्यमंत्री ने मां महागौरी की आराधना के अवसर पर नारीशक्ति के सम्मान और आत्मनिर्भरता के संदेश को दोहराते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, सामर्थ्य और समृद्धि प्रदेश के समग्र विकास के लिए आवश्यक हैं। पोषण, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सुरक्षा और आर्थिक स्वावलंबन से जुड़े प्रयास महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा को नई गति मिलेगी। स्वयं सहायता समूहों, दुग्ध उत्पादक कंपनियों, बीसी सखी और लखपति दीदी जैसी पहलों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास जारी है। नवरात्र के पावन अवसर पर मां महागौरी की आराधना के साथ मुख्यमंत्री ने महिला सम्मान और सशक्तीकरण के संकल्प को रेखांकित किया। उनका संदेश स्पष्ट है कि जब महिलाएं सुरक्षित, सम्मानित और आत्मनिर्भर होंगी, तभी परिवार, समाज और प्रदेश की समृद्धि का मार्ग और अधिक मजबूत होगा। सशक्त नारी, समृद्ध उत्तर प्रदेश।