उत्तर प्रदेश में जल्द ही योगी आदित्यनाथ सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। प्रदर्शन के आधार पर 10-12 मंत्रियों को घुमाने नए और युवा मंत्रियों को मौका मिलने की चर्चा है।
UP Politics: उत्तर प्रदेश में जल्द ही योगी आदित्यनाथ सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार होने की संभावना है। राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा जोरों पर है। कुछ पुराने मंत्रियों को हटाया जा सकता है, जबकि नए युवा चेहरों को मौका मिल सकता है। यह विस्तार 2027 विधानसभा चुनावों से पहले अंतिम बड़ा बदलाव माना जा रहा है। हाल ही में बीजेपी ने पंकज चौधरी को यूपी का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया है, जिसके बाद कैबिनेट में बदलाव की अटकलें बढ़ गई हैं।
मंत्रिमंडल विस्तार में कुछ वरिष्ठ मंत्रियों का पत्ता कट सकता है। प्रदर्शन के आधार पर 10-12 मंत्रियों को बदला जा सकता है। यह गुजरात मॉडल की तरह बड़ा फेरबदल हो सकता है, जहां क्षेत्रीय संतुलन और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखा जाएगा। पूर्वांचल से सीएम और प्रदेश अध्यक्ष होने के कारण पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिल सकता है। NDA सहयोगी दलों को भी अतिरिक्त सीटें दी जा सकती हैं, लेकिन मुख्य रूप से बीजेपी का आंतरिक मामला है।
विस्तार में युवा और नए विधायकों को जगह मिलने की उम्मीद है। इसमें ब्राह्मण, राजपूत, दलित और ओबीसी चेहरों को शामिल किया जा सकता है। पार्टी 2024 लोकसभा चुनावों में कमजोर प्रदर्शन के बाद जातीय समीकरण मजबूत करना चाहती है। छह नए मंत्रियों की चर्चा है, जिसमें एक ब्राह्मण, एक राजपूत, एक दलित और एक ओबीसी शामिल हो सकते हैं।
सबसे बड़ा सवाल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे और नोएडा विधायक पंकज सिंह को लेकर है। पहले भी उनका नाम मंत्री पद की दौड़ में आ चुका है, लेकिन परिवारवाद के आरोप के डर से रोका गया। विपक्ष इस मुद्दे को उठा सकता है। लेकिन इस बार अनुमान है कि पंकज सिंह को योगी कैबिनेट में जगह मिल सकती है। एक्सपर्ट का मानना है कि वे पोटेंशियल एंट्रेंट हैं और पश्चिमी यूपी का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। राजनाथ सिंह के प्रभाव के कारण यह फैसला पार्टी के लिए फायदेमंद माना जा रहा है।
एक और बड़ा मुद्दा तीसरे उप-मुख्यमंत्री का है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीजेपी PDA वोट बैंक को तोड़ने के लिए इस पर दांव खेल सकती है। ओबीसी या दलित चेहरे को यह पद देकर पार्टी विपक्ष को जवाब देना चाहती है। फिलहाल कैबिनेट में 54 मंत्री हैं, जो 60 तक बढ़ सकता है। क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना चुनौती होगी। यह विस्तार बीजेपी की रणनीति का हिस्सा है, जो पंचायत चुनावों से लेकर विधानसभा चुनावों तक प्रभाव डालेगा।