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Sonam Wangchuk Health : डॉक्टरों ने जताया Hypokalemia का खतरा, जानिए लंबे अनशन में क्यों बढ़ जाता है यह रिस्क

दिल्ली में अनशन के दौरान सोनम वांगचुक की सेहत पर डॉक्टरों ने Hypokalemia यानी लो पोटैशियम का खतरा बताया है। जानिए इसके लक्षण, जोखिम और लंबे उपवास में यह क्यों गंभीर हो सकता है।
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Jul 18, 2026
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Safdarjung Hospital Sonam Wangchuk | Design Credit- ChatGPT AI

Safdarjung Hospital Sonam Wangchuk : सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे थे जिनको आज (18 जुलाई, 2026) दिल्ली पुलिस जबरन अस्पताल लेकर गई। निगरानी के दौरान वांगचुक की सेहत को लेकर सफदरगंज अस्पताल के डॉक्टरों ने चिंता जताई है।

उनकी निगरानी कर रहे डॉ. सतीश लांबा के मुताबिक, फिलहाल वांगचुक की स्थिति स्थिर है, लेकिन सबसे बड़ी चिंता हाइपोकैलिमिया (Hypokalemia) को लेकर बनी हुई है।

बता दें, हाई कोर्ट के निर्देश के बाद उन्हें लगातार मेडिकल निगरानी में रखा जा रहा है।

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर हाइपोकैलिमिया क्या है? लंबे समय तक भूख हड़ताल करने वाले व्यक्ति में इसका खतरा क्यों बढ़ जाता है? क्या यह केवल कमजोरी का कारण बनता है या इससे जान का भी जोखिम हो सकता है? आइए जानते हैं मेडिकल विशेषज्ञ और शोध क्या कहते हैं।

क्या है Hypokalemia?

हाइपोकैलिमिया वह स्थिति है, जब खून में पोटैशियम (Potassium) का स्तर सामान्य से कम हो जाता है। पोटैशियम शरीर का एक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोलाइट है, जो

  • दिल की धड़कन को सामान्य रखने में मदद करता है।
  • नसों और मांसपेशियों के सही कामकाज के लिए जरूरी होता है।
  • शरीर में तरल पदार्थ (Fluid Balance) बनाए रखने में भूमिका निभाता है।
  • मांसपेशियों के सिकुड़ने और नसों के सिग्नल भेजने में मदद करता है।

Mayo Clinic के अनुसार, सामान्य रक्त पोटैशियम स्तर 3.6 से 5.2 mmol/L के बीच होता है। यदि यह स्तर काफी नीचे चला जाए, तो यह गंभीर चिकित्सा स्थिति बन सकती है।

सोनम वांगचुक के अनशन से क्यों जुड़ा यह खतरा?

सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से अनशन पर थे। डॉक्टरों के मुताबिक, उनकी सबसे बड़ी मेडिकल चिंता Hypokalemia का जोखिम है।

लंबे समय तक भोजन नहीं लेने पर शरीर पहले ग्लूकोज का उपयोग करता है। इसके बाद ऊर्जा के लिए फैट का इस्तेमाल शुरू होता है। जब उपवास लंबा खिंच जाता है, तो शरीर मांसपेशियों को तोड़कर ऊर्जा लेने लगता है। इस दौरान इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन भी प्रभावित हो सकता है।

यदि पर्याप्त पोषण और मेडिकल निगरानी न मिले, तो शरीर में पोटैशियम का स्तर गिर सकता है। यही वजह है कि लंबे अनशन पर बैठे लोगों की नियमित ब्लड जांच और ECG कराई जाती है।

Hypokalemia के लक्षण क्या हैं?

MayoClinic और National Institutes of Health (NIH) के अनुसार, शुरुआती चरण में कई लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। लेकिन पोटैशियम का स्तर लगातार गिरने पर शरीर संकेत देने लगता है।

प्रमुख लक्षण

  • लगातार कमजोरी
  • जल्दी थकान महसूस होना
  • मांसपेशियों में दर्द या ऐंठन
  • हाथ-पैरों में झुनझुनी
  • कब्ज
  • दिल की धड़कन तेज या अनियमित होना
  • चक्कर आना
  • गंभीर मामलों में सांस लेने में परेशानी

सबसे बड़ा खतरा दिल पर

Hypokalemia का सबसे गंभीर असर हृदय पर पड़ सकता है। NIH के अनुसार, पोटैशियम की कमी से Cardiac Arrhythmia यानी दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है। गंभीर मामलों में यह स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है।

शोध बताते हैं कि बहुत कम पोटैशियम स्तर होने पर -

  • हार्ट रिद्म बिगड़ सकती है।
  • कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ सकता है।
  • मांसपेशियों में लकवे जैसी स्थिति आ सकती है।
  • सांस लेने वाली मांसपेशियां भी प्रभावित हो सकती हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer):पत्रिका ऐप पर उपलब्ध सामग्री विशेषज्ञों की राय और विस्तृत शोध के आधार पर तैयार की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता प्रदान करना है। किसी भी विशिष्ट समस्या के सटीक समाधान के लिए कृपया संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

Updated on:
18 Jul 2026 04:25 pm
Published on:
18 Jul 2026 04:25 pm