विविध भारत

विकसित भारत 2047′ की कल्पना में ग्रामीण महिलाओं के लिए डिजिटल समानता को बनाना होगा केंद्रबिंदु

 - बिमटेक के राष्ट्रीय सेमिनार में विशेषज्ञों की राय
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नई दिल्ली। विकसित भारत @ 2047 के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए, बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी (बिमटेक) ने राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया। इसका विषय: डिजिटल समावेशन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाना: एनजीओ'ज की भूमिका। यह कार्यक्रम भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के सहयोग से आयोजित किया गया।

इस सेमिनार में विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, विकास क्षेत्र के पेशेवरों और जमीनी स्तर के सामाजिक परिवर्तनकर्ताओं ने भाग लिया। उन्होंने इस बात पर चर्चा की कि किस प्रकार डिजिटल समानता ग्रामीण भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण को गति दे सकती है।

कार्यक्रम में डॉ. नीलम गुप्ता (अध्यक्ष एवं सीईओ, आरोह फाउंडेशन) और मधुबन पांडे (सह-संस्थापक एवं सीईओ, स्कोर लाइवलीहुड फाउंडेशन) ने अपने विचार साझा किए। मुख्य भाषण में “ग्रामीण महिलाओं के लिए डिजिटल इक्विटी का महत्व”, “वर्तमान सरकारी पहल और नीतियाँ”, तथा “डिजिटल समावेशन के सूत्रधार के रूप में एनजीओ” जैसे विषय शामिल थे।

बिमटेक की निदेशक डॉ. प्रवीणा राजीव ने कहा: "डिजिटल समावेशन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाना सिर्फ एक सामाजिक आवश्यकता नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है। जैसे-जैसे हम विकसित भारत@2047 की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि डिजिटल यात्रा में कोई भी पीछे न छूटे। यह सेमिनार संवाद को प्रेरित करने, कार्रवाई को प्रोत्साहित करने और एक अधिक न्यायसंगत और सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में हमारे प्रयासों का हिस्सा है।"

सेमिनार में “डिजिटल बाधाओं को तोड़ना: जमीनी अनुभव” विषय पर एक गहन 'फायरसाइड चैट' आयोजित हुई, जिसमें उन ग्रामीण महिलाओं की सच्ची कहानियाँ साझा की गईं जिन्होंने डिजिटल दुनिया की चुनौतियों को पार किया। हैंड इन हैंड इंडिया, रेशम सूत्र, और ग्रामीण फाउंडेशन जैसे संगठनों ने बताया कि कैसे डिजिटल साक्षरता के माध्यम से महिलाएं माइक्रो-उद्यम चला रही हैं, सरकारी योजनाओं तक पहुंच बना रही हैं और बड़े बाज़ारों से जुड़ रही हैं। यह चर्चा डिजिटल उपकरणों की पहुंच से मिली वित्तीय स्वतंत्रता को दर्शाने के साथ-साथ एनजीओ'ज की डिजिटल मार्गदर्शन में अहम भूमिका को भी रेखांकित करती है।

इसके बाद दो महत्वपूर्ण पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं: 1- “डिजिटल समानता के उत्प्रेरक के रूप में एनजीओ'ज” – जिसमें एनजीओ'ज और स्वयं सहायता समूहों द्वारा समुदायों की तकनीकी अपनाने की यात्रा को आसान बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए कार्यक्रमों पर चर्चा हुई। 2- “डिजिटल समावेशन का भविष्य: एआई, फ़िनटेक और आगे” – जिसमें उभरती तकनीकों जैसे एआई-आधारित उपकरण, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई और माइक्रोफाइनेंस ऐप्स के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की वित्तीय पहुँच में आए परिवर्तन पर प्रकाश डाला गया। इस सत्र में डेटा गोपनीयता, पहुंच, और समावेशिता जैसे नैतिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

सेमिनार में बिमटेक द्वारा चलाए जा रहे यूरोपीय संघ वित्तपोषित प्रोजेक्ट "KODECET" और "AIDEdu" के तहत संस्थान की समावेशी एवं सतत विकास में भूमिका पर विशेष सत्र प्रस्तुत किया गया। इसके अतिरिक्त “ISDM डेटा साइट का उपयोग” विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन, प्रमाणपत्र वितरण और खुले मंच पर विचार साझा करने के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने डिजिटल सशक्तिकरण के साझा उद्देश्य को लेकर सार्थक चर्चाएं और नेटवर्किंग की।

यह आयोजन ICSSR शोध अनुदान 'विजन विकसित भारत@2047 परियोजना' के अंतर्गत, जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, लखनऊ और इंडियन स्कूल ऑफ डेवलपमेंट मैनेजमेंट (ISDM) के सहयोग से किया गया।

Updated on:
17 May 2025 11:42 am
Published on:
17 May 2025 11:42 am
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