
नई दिल्ली: स्मार्टफोन जेब और हाथ पर जितनी आसानी से फिट हो जाता है उतनी ही आसानी से इसे चोरी भी किया जा रहा है। आज कल मोबाइल फोन चोरी की घटना भी काफी बढ़ गई है। आपने अक्सर यह देखा होगा कि मार्केट या बस जैसी भीड़-भाड़ वाली जगहों पर स्मार्टफोन की चोरी सबसे ज्यादा होती है। इसी को देखते हुए स्वीडन ( Sweden ) की कंपनी एरिक्सन ( Ericsson ) ने एक ऐसी टेक्नोलॉजी को विकसित किया है जिसकी मदद से स्मार्टफोन चोरी की घटनाओं को काफी कम किया जा सकता है। इस टेक्नोलॉजी को पेटेंट करवाने के लिए कंपनी ने फरवरी महीने में आवेदन किया था। कंपनी का कहना है कि एक बार पेटेंट मिलने पर हम इसका उत्पादन शुरु कर देंगे।
इस टेक्नोलॉली में मोबाइल फोन चोरी से बचाने के लिए बायोमीट्रिक, फिंगरप्रिंट और पहचान के लिए ऑप्टिकल सेंसर का इस्तेमाल किया गया है। यह सेंसर अलग-अलग मोड पर काम करेगा। इसमें लो फ्रिक्शन मोड के जरिए दिल की धड़कनों का भी पता लगाया जा सकता है कि यह फोन मालिक का है या नहीं। इसके अलावा हाई फ्रिक्शन मोड में यह भी पता लगया जा सकता है कि मोबाइल फोन हाथ या जेब में है या कहीं और है। इस टेक्नोलॉजी के आ जाने के बाद अगर आप इसका इस्तेमाल अपने स्मार्टफोन में करते हैं और चोर जैसे ही आपकी जेब से फोन चुराने की कोशिश करेगा, वह इतनी तेजी से वाइब्रेट करेगा कि उसे पकड़ना आसान नहीं होगा। ऐसा इस लिए होगा क्योंकि यह लो फ्रिक्शन मोड में आ जाने के कारण इसकी सतह चिकनी हो जाएगी और लगातार वाइब्रेट होने के कारण इसे पकड़ पाना काफी मुश्किल हो जाएगा।
इस टेक्नोलॉजी की मदद से कोई भी स्मार्टफोन यूजर भीड़ जैसी जगहों पर बड़े आराम से घूम सकेगा और उसे फोन चोरी होने का भी कोई तनाव नहीं रहेगा। इस टेक्नोलॉजी से स्मार्टफोन चोरी की घटनाओं को रोका जा सकता है। फिलहाल अभी यह टेक्नोलॉजी मार्केट में उपलब्ध नहीं है। लेकिन रिपोर्ट की माने तो कंपनी इसे जल्द ही उपलब्ध कराने की कोशिश में जुटी हुई है।